Gujarat election 2017: कांग्रेस की तीन बड़ी गलतियां, राहुल ने कैसे किया डेमेज कंट्रोल

rahul

नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में कांग्रेस के पहले चरण का चुनाव प्रचार खत्म होते होते तीन बड़ी गलतियां की हैं। ये बात अलग है कि राहुल गांधी के निर्देश के बावजूद ये गलतियां की गईं जिन्हें बीजेपी ने मुद्दा बनाने में देर नहीं की। दिलचस्प ये है कि राहुल गांधी भले ही गुजरात चुनाव जीते या न जीतें लेकिन कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। जो गलतियां हुईं उनका डेमेज कंट्रोल भी राहुल गांधी खुद ही कर रहे हैं और जिस तरह से बीजेपी के हमले को झेल कर वार पलटवार कर रहे हैं वो उनके भविष्य के लिए बेहतर संकेत दे रहे हैं।

गुजरात में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर

गुजरात में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर

राहुल गांधी ने वो सारे तौर तरीके अपनाए हैं जो बीजेपी अभी तक अपनाती आई है। इसीलिए बीजेपी को जो जीत आसान लग रही थी वो लगातार कठिन होती जा रही है और अभी तक जितने ओपिनियन पोल आए हैं या फिर ग्राउंड जीरो से जो हालात पता चल रहे हैं उसमें टक्कर कांटे की हो गई है और थोड़ी सी चूक किसी के लिए भी भारी पड़ सकती है। कांग्रेस ने अब तक वो तीन बड़ी गलतियां की हैं जिससे बीजेपी को फायदा मिला है और कांग्रेस को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है। पहली गलती यूथ कांग्रेस की थी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चायवाला कह कर मजाक उड़ाया गया था। इस तरह की तस्वीर पोस्ट की गई और जब बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया तो तस्वीर हटा ली गई।

पार्टी में राहुल के फैसलों का असर

पार्टी में राहुल के फैसलों का असर

दूसरी गलती सोमनाथ मंदिर के गैर हिंदू रजिस्टर में राहुल गांधी का नाम दर्ज करने से हुई। ये बात अलग है कि इसके बाद राहुल गांधी हिंदू वोट के और करीब हुए। जिस तरह उनका जनेऊ तक पार्टी ने दिखाया उससे कम से कम हिंदू न होने के बीजेपी के मुद्दे से निजात मिल गई। तीसरी बड़ी गलती मणिशंकर अय्यर ने की है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे और काबिले तारीफ है कि राहुल गांधी ने उन्हें माफी मांगने को कहा और मणिशंकर अय्यर को ज्यादा वक्त नहीं लगा। उन्होंने माफी मांग ली। गुजरात चुनाव भले ही बीजेपी जीत ले लेकिन कांग्रेस इस जीत के अंतर को जितना कम करेगी, वो उसकी जीत होगी। सबसे बड़ी बात कांग्रेस के लिए ये भी है कि इस चुनाव के बाद उन्हें नया नेता मिलने वाला है और इस नए नेता के मिलने का मतलब है कि फैसले तात्कालिक होंगे, जो गुजरात चुनाव में भी दिख रहा है। कांग्रेसी मान चुके हैं कि अब उन्हें दो नाव की सवारी छोड़नी होगी और सोनिया गांधी की नाव छोड़ कर राहुल की नाव में सवार होना होगा। जो दो तरफा चलेगा वो भी मात खाएगा।

नए साल में कांग्रेस के नए तेवर

नए साल में कांग्रेस के नए तेवर

नए साल में कांग्रेस के नए तेवर होंगे। जो राहुल गांधी की गुड बुक में होंगे, वो तो कांग्रेस में चलेंगे, दौड़ेंगे, और जो नहीं होंगे, वो धीरे धीरे विलुप्त होते जाएंगे। कांग्रेस में ये नया ट्रेंड नहीं हैं, पुरानी परिपाटी यही चली आ रही है। गुजरात में जिस तरह राहुल गांधी ने तेवर दिखाए हैं, और क्रिया पर प्रतिक्रिया दी है, उससे साफ है कि वो अब बैकफुट के बजाए फ्रंटफुट की राजनीति के लिए तैयार हैं, मतलब, अब आगे जो भी चुनाव होंगे, वो मोदी बनाम राहुल होंगे, गुजरात ने इसकी शुरूआत कर दी है।

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