मणिपुर में सस्पेंड होने के बाद तीन अधिकारियों ने सरकार से मांगी माफी, विधायकों पर लगाया संगीन आरोप
मणिपुर में शिक्षा विभाग के तीन अधिकारियों को 12 जनवरी को सस्पेंड कर दिया गया था। इन अधिकारियों ने सीबीएसई की मान्यता के लिए दो जिलों के स्कूलों के आवेदन को बिना प्रक्रिया पूरा किए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया था।
लेकिन अब इन तीनों अधिकारियों ने सरकार से लिखित माफी मांगी है। मणिपुर में जब दो समुदायों के बीच संघर्ष चल रहा था, उस दौरान इन अधिकारियों ने दो जिलों में स्कूलों को मान्यता के लिए बिना नियमों का पालन किए एनओसी दी थी।

इन तीनों ही अधिकारियों ने अपने मांफीनामे में कहा है कि उन्हें मजबूरन छात्र संगठन और सिविल सोसाइटी के दबाव में यह एनओसी देनी पड़ी थी। इन अधिकारियों ने पत्र में कहा है कि चूरचंदपुर के चार विधायक और कंगपोकपी जिले के दो विधायकों ने पत्र लिखकर दो जोनल एजूकेशन अधिकारियों और एक डिप्टी इंस्पेक्टर स्कूल को एनओसी देने के लिए अपील की थी।
जिन चार विधायकों का नाम सामने आया है वो 10 कूकी जो विधायक हैं। ये वो विधायक हैं जो मणिपुर से अलग राज्य की मांग कर रहे हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजूकेशन ने 20 दिसंबर 2023 को मणिपुर के 25 स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया था। प्रदेश सरकार ने सीबीएसई को अलर्ट किया था कि सरकार की ओर से इन स्कूलों को कोई एनओसी नहीं दी गई है।
सीबीएसई की कार्रवाई के बात मणिपुर सरकार ने 12 जनवरी को चूरचंदपुर के जेडईओ जंगखोहाओ हाओकिप, जेडईओ लिंगिटेंग सिंगसिट और डिप्टी इंस्पेक्टर एल तैथुल को सस्पेंड कर दिया है। इन तीनों अधिकारियों ने पत्र में कहा कि उन्हें पता था कि हम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, लेकिन बाहरी दबाव के चलते हमारे पास दूसरा विकल्प नहीं था।












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