कर्नाटक में मीलों पैदल चलकर बस अड्डे पहुंच रहे लोग, फिर भी नहीं हो पा रही घर वापसी
नई दिल्ली: पिछले 40 दिनों से जारी लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को राहत देते हुए उन्हें घर जाने की इजाजत दे दी थी। कुछ राज्यों ने अपने लोगों के लिए ट्रेन और बसों का इंतजाम तो कर दिया लेकिन अभी भी कई राज्य ऐसे हैं जहां पर मजदूर मदद की आश में बैठे हैं। शनिवार को बड़ी संख्या में मजूदर कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों से घर जाने के लिए बेंगलुरु पहुंचे। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी जमकर धज्जियां उड़ीं।

बस और ट्रेन चलने की खबर सुनते ही शनिवार को बड़ी संख्या में लोग बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पहुंच गए। यहां आए मजदूरों के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से प्राइवेट वाहन, टैक्सी नहीं चल रही, जिस वजह से 20-30 किलोमीटर पैदल चलकर वो बस अड्डे पहुंचे। वहीं कुछ प्राइवेट वाहनों ने थोड़ी ही दूरी के लिए हजारों रुपये वसूल लिए। वो इधर-उधर बस के लिए भटकते रहे, ना ही उन्हें बस मिली ना ही अधिकारियों की ओर से कोई जवाब। बेंगलुरु के सभी रेलवे स्टेशनों पर भी यही हाल है। मजदूर और प्रवासी लोग घर जाने के चक्कर में स्टेशन पहुंच गए। इस दौरान उन्हें स्टेशन के अंदर नहीं जाने दिया गया।

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां
गृह मंत्रालय ने साफ किया था कि मजूदरों और प्रवासी लोगों को घर भेजते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन होना चाहिए। इसके बावजूद बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस अड्डे पर सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ी। जहां पर लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। वहीं बड़ी तादाद में लोग ऐसे भी थे जिनके पास मास्क तक नहीं था।
मजदूरों से वापस नहीं जाने की अपील
वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने लोगों से घर वापस नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने मजदूरों को आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द ही कर्नाटक में आर्थिक गतिविधियां बहाल हो जाएंगी। इस संबंध में सरकार ने वाणिज्य और उद्योग संघ के प्रतिनिधियों से बात कर ली गई है। जल्द ही लोगों के रोजगार की व्यवस्था हो जाएगी। ऐसे में वो घर वापस ना जाकर यहीं रुकें।












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