ये वर्ल्ड रिकॉर्ड है बिहार के नाम, अपने ही कीर्तिमान को दूसरी बार तोड़ने की तैयारी

नई दिल्ली। बिहार सामाजिक क्रांति के अग्रदूत के रूप में उभर रहा है। सामाजिक सरोकार के लिए वह वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। 19 जनवरी 2020 को बिहार पर्यावरण जागरुकता के लिए 16 हजार 298 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना कर एक नया विश्वकीर्तिमान बनाने वाला है। विश्व में सबसे लंबी मानवश्रृंखला के अपने ही वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ कर बिहार फिर इतिहास रचने वाला है। ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में जल-जीवन-हरियाली के नाम से एक अभियान शुरू किया है। बिहार में ग्रीनफील्ड बढ़ाने के लिए वे इन दिनों गांव- गांव की यात्रा कर रहे हैं। इस अभियान की सफलता के लिए ही 19 जनवरी को रिकॉर्डतोड़ मानव श्रृंखला बनने वाली है। इसके पहले सबसे लंबी मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था। 2004 में वहां 1050 किमोटीर लंबी मानव श्रृंखला बनी थी। 2017 में बिहार ने 11 हजार 292 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना कर बांग्लादेश के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। 2018 में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ कर बिहार ने फिर एक बड़ा कारनामा किया। अब इस रिकॉर्ड को तीसरी बार तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है।

जल-जीवन- हरियाली अभियान

जल-जीवन- हरियाली अभियान

जल-जीवन-हरियाली, नशामुक्ति, दहेज उन्मूलन और बाल विवाह निषेध अभियान की सफलता के लिए 19 जनवरी को पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनने वाली है। इस मानव श्रृंखला की लम्बाई 16 हजार 298 किलोमीटर होगी जो कि एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा। इसके लिए सभी 38 जिलों में रुट तय कर लिये गये हैं। मेन रुट और सब रूट का खाका जिलों को भेज दिया गया है। किस जिले में किस-किस सड़क के किनारे लोग खड़े हो श्रृंखला बनाएंगे इसको चिन्हित कर लिया गया है। शिक्षा विभाग को इस कार्यक्रम की जिम्मेवारी दी गयी है। जगरुकता फैलाने के लिए सात लाख नारे लिखे गये हैं।

जल-जीवन हरियाली अभियान की जरूरत क्यों पड़ी ?

जल-जीवन हरियाली अभियान की जरूरत क्यों पड़ी ?

2019 में बिहार के 280 प्रखंड सूखे से प्रभावित हुए थे। सर्वे के बाद पता चला कि राज्य के अधिकांश जिलों में भू जलस्तर बहुत नीचे चला गया है जिससे सिंचाई प्रभावित हुई क्यों कि अधिकतर बोरिंग फेल हो गये। पानी पीने के लिए लगे चापाकल बेकार हो गये। तब महसूस हुआ कि अगर जल्द भूजलस्तर को ऊपर उठाने के उपाय नहीं किये गये तो स्थिति भयावह हो जाएगी। इसके बाद जलसंरक्षण के लिए राज्य के तालाब, झील, चौर समेत 93 हजार से अधिक जलश्रोतों के पुनरुद्धार का फैसला लिया गया। पर्यावरण असंतुलन के कारण इस साल बिहार में खरीफ खेती के समय जून-जुलाई में बारिश नहीं हुई जब कि सितम्बर- अक्टूबर में जोरदार बारिश हुई। पर्यावरण संतुलन के लिए बिहार में ग्रीनकवर बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 2000 में जब झारखंड से अलग हुआ था तब बिहार का ग्रीन कवर केवल 9 फीसदी था। हरियाली का दायरा कम होने से ग्लोबल वार्मिंग का असर बढ़ने लगा था। इसकी वजह से बिहार में मानसून अनियमित रहने लगा। कभी सुखाड़ तो कभी तो कभी बाढ़ से फसल मारी जाने लगी।

ग्रीन कवर 17 फीसदी करने का लक्ष्य

ग्रीन कवर 17 फीसदी करने का लक्ष्य

2012 में सरकार ने हरियाली मिशन की शुरुआत की जिसके तहत 19 करोड़ पौधे लगाये गये। इसके बाद बिहार का ग्रीन कवर 15 फीसदी पहुंच गया। अब जल-जीवन हरियाली के माध्यम से ग्रीन कवर को 17 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने के लिए कुआं, तालाब जैसे परम्परागत जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांव-गांव घूम कर लोगों से पौधा लगाने और आहर पइन, तालाब से अतिक्रमण हटाने की अपील कर रहे हैं। इस अभियान को कामयाब बनाने के लिए ही मानव श्रृंखला की तैयारी चल रही है।

रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड

रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड

बिहार ने शराबबंदी और नशामुक्ति की जागरुकता के लिए 21 जनवरी 2017 को 11 हजार 292 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना कर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। इसके पहले दिसम्बर 2004 में अवामी लीग ने तत्कालीन बांग्लादेश की सरकार को बर्खास्त करने के लिए तेनकान से लेकर तांतुलिया तक 1050 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनायी थी। इसमें 14 विपक्षी दलों समेत साढ़े छह करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया था। 2017 में बिहार के रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रतिनिधि पटना आये थे। 2018 के संस्करण में यह रिकॉर्ड प्रकाशित हा था। ड्रोन कैमरे से इसकी फोटोग्राफी करायी गयी थी। इसके बाद 21 जनवरी 2018 को दहेज उन्मूलन और बाल विवाह उन्मूलन की जागरुकता के लिए 13 हजार 647 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना कर बिहार ने अपने ही वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। यह कामयाबी तब मिली जब पटना हाईकोर्ट ने इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के शामिल होने की बाध्यता खत्म कर दी थी। कोर्ट में एक लोकहित याचिका दाखिल कर शिकायत की गयी थी कि सरकार अपने रिकॉर्ड को बनाने के लिए बच्चों को जबरन मानव श्रृंखला में शामिल कर रही है। लेकिन शिक्षकों, बच्चों और आम लोगों ने मर्जी से इसमें शामिल हो कर एक नया कीर्तिमान बनाया। अब 19 जनवरी 2020 को 16 हजार 298 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना कर तीसरी बार रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी है।

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