दो पति, एक हिंदू और एक मुस्लिम तो महिला कौन हुई? 11 साल में कोर्ट नहीं कर पाया इंसाफ
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। महिला ने दो शादी की थीं, दोनों से महिला को बच्चे पैदा हुए। महिला की पहली शादी जिस शख्स से हुई थी, उनका नाम है- प्रसाद राय। दूसरी शादी जिस व्यक्ति हुई उनका नाम है- गोराई मल्लिक। मृत्यु के वक्त महिला की उम्र करीब 70 साल थी। मतलब बच्चे काफी बड़े चुके थे, इतने बड़े कि मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार को लेकर कोर्ट-कचहरी कर सकें। अदालती कार्यवाही चलती रही और चलते-चलते 11 साल बीत गए। मतलब 2007 में जिस महिला की मृत्यु अस्पताल में हुई थी, उस महिला का शव आज भी उसी अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा हुआ है और अब कंकाल में बदल चुका है, लेकिन महिला का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। कारण है- धर्म। बीते 11 साल से यह तय नहीं हो सका है कि महिला का अंतिम संस्कार किस धर्म के तहत किया जाए। अदालत अब तक तय नहीं कर पाई है कि महिला हिंदू थी या मुसलमान।

रीना रॉय नाम की महिला पहुंची अस्पताल और कहानी में आ गया नया मोड़
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हावड़ा जिला अस्पताल से सूचना अधिकार कानून यानी आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से पता चला है कि 01 नवंबर 2007 को हावड़ा के जगाछा थानांतर्गत बालापुकुर लेन इलाके में रहने वाले गोराई मल्लिक अपनी पत्नी परी को हावड़ा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वह बहुत बीमार थीं। एक दिन बाद यानी 02 नवंबर को महिला ने इलाज के दौरान ही दम तोड़ा दिया। अस्पताल में महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनने जा रहा था कि रीना रॉय नाम की महिला वहां पहुंची। महिला ने कहा कि महिला का नाम परी मल्लिक नहीं बल्कि परी राय है। रीना रॉय ने बताया कि महिला के पति का नाम प्रसाद राय है, जो अब दुनिया में नहीं हैं। रीना ने अस्पताल प्रशासन से परी का शव सौंपने की मांग की, जिससे कि हिंदू रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।

अस्पताल ने मांगा अधिकार पत्र और मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के पास चला गया
उधर, महिला के दूसरे पति गोराई मल्लिक, जो परी को अस्पताल लाए थे, उनका परिवार रीना रॉय की मांग का विरोध करने लगा। दोनों परिवारों में विवाद हो गया और अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। अस्पताल प्रबंधन दोनों परिवारों से कहा कि जो भी कानूनी रूप से अधिकार पत्र लाएगा, शव को उसी के हवाले कर दिया जाएगा। महिला का शव अस्पताल के मुर्दाघर में रख दिया गया और उधर दोनों परिवारों के लोग कलकत्ता हाईकोर्ट की शरण में चले गए।

एक पति हिंदू तो दूसरा पति मुसलमान, अब कैसे हो अंतिम संस्कार?
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि परी हिंदू थीं और उनकी पहली शादी प्रसाद राय से हुई थी, वह भी हिंदू ही थे। प्रसाद की मौत के बाद परी ने दूसरी शादी की गोराई मल्लिक के साथ, जो कि मुस्लिम हैं। अब दोनों पतियों से हुए बच्चे अपने-अपने धर्म के अनुसार महिला का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। उधर, मामला अब कोर्ट में ही चल रहा है और महिला का कंकाल अस्पताल के मुर्दाघर में ही पड़ा हुआ है।












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