भारत में हैं लगभग 3000 गैरअधिकारिक कोरोना पॉजिटिव केस, तेजी से हो रही ऐसे मामलों में वृद्धि

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा हैं। देश में अब तक 1,45,380 लोग कोरोनोवायरस संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। लेकिन इसमें से तीन हजार ऐसे मामले हैं जो गैर अधिकारिक मामले हैं यानी कि वो किस राज्य के केस हैं यह निर्धारित नहीं हैं। जानकारों के अनुसार राज्यों के अंतर्गत अवागमन शुरु होने के बाद ऐसे मामलों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हो रहा हैं।

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बता दें राज्यों के अंतर्गत अवागमन शुरु होने के बाद ये पिछले एक सप्ताह में ऐसे 2,970 से अधिक केस दर्ज किए गए हैं। मालूम हो कि गैर-सूचीबद्ध श्रेणी के मामले देश के कुल कोरोनोवायरस संक्रमण के मामलों का दो प्रतिशत हैं। गौरतलब हैं कि गैरअधिकारिक मामले वो हैं जैसे कि किसी एक राज्य में काम करने वाला व्‍यक्ति जब टेस्‍ट कराने जाता हैु तो बताता है कि वो दूसरे राज्य का है लेकिन काम के सिलसिले में यहां आया है ऐसे में वो किस राज्य के कोरोना पॉजिटिव मरीजों की लिस्‍ट में शामिल किया जाए इसे लेकर भारी परेशानी हो रही हैं। मालूम हो कि 16 मई को ऐसे मामलों की संख्‍या 230 थी जो अंतराज्जीय अवागमन शुरु होने के बाद ऐसे केसों की संख्‍या 26 मई को बढ़कर 1,403 हो गई हैं। अब तक ऐसे कुल लगभग कुल 3000 मामले दर्ज किए गए हैं। इस श्रेणी में अन्य राज्य श्रेणियों के विपरीत, इस समूह के ठीक होने या इन मरीजों की मृत्यु की कोई जानकारी नहीं है।
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एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश में बढ़ती अंतर-राज्यीय यात्रा की वजह से अप्रकाशित श्रेणी बढ़ती रही है - देशव्यापी आंदोलन महामारी को ट्रैक करने के प्रयासों को कैसे प्रभावित कर सकता है इसका ये एक संकेत हैं। उन्होंने कहा, "ऐसे मामले हैं जहां हमें आश्वस्त करने की आवश्यकता है क्योंकि जहां वे भर्ती हैं या जहां उन्हें अलग किया जा रहा है उन्हें अभी भी निर्धारित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, ट्रक ड्राइवर जिसमें लक्षण पाए जाने के बाद टेस्‍ट करवाते हैं तो एक राज्य को अब उनके मालिक होने की जरूरत है। एक बार उनका परीक्षण सकारात्मक होने के बाद, यह प्रणाली में आता है। लेकिन सिस्टम को यह नहीं पता है कि इस व्यक्ति को किस राज्य में रखा जाना है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के एक अधिकारी ने कहा: "हम जिस नियम का उपयोग करते हैं, वह यह है कि जहां भी किसी का परीक्षण किया जाता है, वह स्वचालित रूप से इनपुट किया जाता है। यदि, उदाहरण के लिए, यूपी के किसी व्यक्ति का दिल्ली में परीक्षण किया जाता है, तो परीक्षण का नमूना दिल्ली को सौंपा जाएगा। लेकिन क्या होगा अगर नमूना संग्रह के दौरान, व्यक्ति ने कहा कि वे यूपी से हैं? फिर, एक बार जब एक सकारात्मक नमूना वापस आता है, तो हमें यह निर्धारित करने की आवश्यकता होती है कि अब यह कौन सा स्थान है - अस्पताल में भर्ती होने, आइसोलेशन इत्यादि के लिए, इसलिए हर दिन, जानकारी मिलते ही हमें स्थानों को स्थानांतरित करना होगा। "

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राज्यों के भीतर भी अवागमन बढ़ रहा हैं। ऐसे में आंध्र प्रदेश में अब तक ऐसे 312 मामले हैं जो कि राज्य के 2,719 कुल मामलों के 10 प्रतिशत से अधिक हैं। वहीं तमिलनाडु में ऐसे केसों की संख्‍या 21 मई को 40 से बढ़कर मंगलवार को 92 हो गई है। गुजरात में, यह उसी समय में 26 से बढ़कर 43 हो गया। बता दें 1 मई और 15 मई के बीच, प्रवासियों को घर ले जाने वाली 1,000 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में से दो-तिहाई ने रेड ज़ोन से ग्रीन या ऑरेंज ज़ोन के लिए 8 लाख यात्रियों को भेजा गया और वहीं घरेलू उड़ानें सोमवार से शुरू हुईं, और पिछले कुछ हफ्तों में, राज्यों के बीच वाहन की आवाजाही भी बढ़ी है ऐसे में ऐसे मामलों की संख्‍या और बढ़ने वाली हैं।
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