एंटीनेशनल कौन? सवाल का गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में दिया जवाब
नई दिल्ली, 21 दिसंबर: केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि संविधान में 'राष्ट्र-विरोधी' शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। गृह मंत्रालय से सवाल किया गया था कि सरकार बताए कि किसको एंटीनेशनल (देशद्रोही) कहा जाएगा। इस पर जवाब देते हुए मंगलवार को गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में कहा, देश के संविधान में एंटीनेशनल शब्द की कोई परिभाषा नहीं दी गई है। हालांकि, ऐसी गैरकानूनी और विध्वंसक गतिविधियों से सख्ती से निपटने के लिए कई आपराधिक कानून और विभिन्न न्यायिक व्यवस्थाएं हैं जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हों।

गृह राज्यमंत्री ने कहा, यह बताना भी प्रासंगिक है कि संविधान (ब्यालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 को अनुच्छेद 31D (आपातकाल के दौरान) को सम्मिलित किया गया था। इसमें 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधि' को परिभाषित किया गया था। यह अनुच्छेद 31D, संविधान के (तितालिसवां संशोधन) अधिनियम में 1977 में हटा दिया गया था।
हंगामेदार रहा है मौजूदा संसद सत्र
संसद का मौजूदा यानी शीतकालीन सत्र सोमवार (29 नवंबर) से शुरू हुआ है। ये सत्र अब तक काफी हंगामेदार रहा है। खासतौर से लखीमपुर खीरी के मामले को लेकर ससंद में गतिरोध है। विपक्ष लगातार सरकार से लखीमपुर खीरी में किसानों को जीप से कुचलकर मारने से जुड़े मामले में आरोपी गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को हटाने की मांग कर रहा है। विपक्षी सासंद एसआईटी की रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, जिसमें लखीमपुर की घटना को प्लान बनाकर अंजाम देने की बात कही गई है। इसको लेकर विपक्ष की ओर से लगातार संसद के दोनों सदनों में आवाज उठाई जा रही है। हालांकि सरकार ने अभी तक विपक्ष को अनसुना किया है और ऐसे संकेत नहीं दिए हैं, जिससे लगे कि वो टेनी को हटाने के पक्ष में है। हालांकि हंगामे के बीच ही विपक्ष को दरकिनार करते हुए सरकार ने कई बिलों को पास भी करा लिया है।












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