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टूरिस्टों की वजह से यहां के मवेशी बन गए हैं नॉन-वेजिटेरियन, चिकन और फिश पसंद है

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नई दिल्ली- क्या आपने कभी किसी पशु के मांसाहारी खाना खाते हुए देखा या उसके बारे में सुना है। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता। क्योंकि, कुदरत ने उन्हें शाकाहारी बनाया है। लेकिन, गोवा में कुदरत का यह नियम भी बदलने लगा है। इस बात का खुलासा खुद गोवा सरकार के एक मंत्री ने किया है। हाल में गोवा में कम से कम 76 ऐसे आवारा पशुओं का इलाज शुरू करना पड़ा है, जो घास खाना भूल चुके हैं और सिर्फ मुर्गा और मछली की तलाश में रहते हैं। राज्य सरकार उनकी आदत को सामान्य बनाने के लिए विशेष पशु चिकित्सकों की मदद ले रही है। मवेशियों में ये बदलाव खासकर तटीय इलाकों में घूमने वाले पशुओं में देखा जा रहा है।

पशुओं के पाचन-तंत्र में हुआ बदलाव

पशुओं के पाचन-तंत्र में हुआ बदलाव

गोवा में समंदर किनारे आवारा घूमने वाले मवेशियों की खानपान की आदत बदल चुकी है। ये शाकाहारी पशु अब घास की बजाय मांसाहारी खाने की तलाश में घूमते रहते हैं। इसकी वजह ये बताई जा रही है कि ये जानवरी होटलों से फेंके गए बचा हुआ खाना खाते हैं, जिससे उन्हें नॉन-वेज खाने की आदत पड़ गई है। ये दावा किसी और ने नहीं, बल्कि गोवा सरकार के कचरा प्रबंधन मंत्री माइकल लोबो ने किया है। लोबो के मुताबिक, 'आवारा पशु पहले पूरी तरह शाकाहारी थे। लेकिन, बचे हुए खाने में चिकन और मछली खाने से उनका पाचन तंत्र मानव जैसा हो गया है।' दरअसल, गोवा के तटीय इलाकों में बड़ी संख्या में देशी और विदेशी सैलानी आते हैं। जिनकी वजह से यहां के होटलों में हमेशा भीड़ होती है और पार्टियां चलती हैं। जब, होटलों में खाना बर्बाद होता है तो उसे कचरे के रूप में बाहर फेंक दिया जाता है और आवारा जानवर उसी की तलाश में भटकते रहते हैं।

अब घास को मुंह तक नहीं लगाते यहां के मवेशी

अब घास को मुंह तक नहीं लगाते यहां के मवेशी

लोबो की मानें तो आवारा मवेशियों की खाने की आदत में ये बदलाव मुख्य तौर पर कलंगुट और कंडोलिम इलाके के जानवरों में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'आरपोरा-नागोवा और दूसरे गांवों के पशु अभी भी शाकाहारी हैं।' बता दें कि गोवा में आवारा पशुओं की समस्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच स्थानीय नगरपालिका को फटकार भी लगा चुकी है। इसका कारण ये है कि आवारा पशुओं के चलते यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। इसी के बाद कलंगुट पंचायत ने हाल ही में 76 आवारा पशुओं को पकड़कर बिचोलिम स्थित गोशाला में पहुंचाया था, जब उनकी आदतों में आए इस बड़े परिवर्तन का पता चला। उनकी देखभाल करने वाले तब हैरान रह गए जब वे मवेशियों के लिए उपलब्ध खाने को मुंह तक लगाने के लिए तैयार नहीं हुए।

पशुओं को फिर से शाकाहारी बनाने के लिए इलाज शुरू

पशुओं को फिर से शाकाहारी बनाने के लिए इलाज शुरू

जानकारी के मुताबिक समुंदर किनारे आवारा घूमने वाले मवेशियों ने इसलिए शाकाहारी खाना छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें मांस खाने की आदत पड़ गई है। अब गोशाला में उनकी इस आदत को फिर से सामान्य बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। लोबो के मुताबिक, 'गोशाला में विशेष पशु चिकित्सक इनका इलाज कर रहे हैं।' उन्होंने ये भी कहा है कि 'उनके पाचन तंत्र को फिर से शाकाहारी बनने में कुछ दिन का समय लगेगा। वो कुछ भी नहीं खाना चाह रहे। उन्हें घास दिया जा रहा है तो वे नहीं खाते। ऐसा पहली बार हो रहा है कि हमें ऐसी चीजें देखने को मिली हैं और इसके लिए हम लोग ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि हम उन्हें ऐसा कचरा खिला रहे हैं।'

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English summary
the stray cattle in goa have become like non-vegetarian due to leftover hotel food
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