The Satanic Verses का नाम सुनते ही भड़के थे मुस्लिम संगठन, जानिए क्यों पूर्व PM को बैन करनी पड़ी थी किताब?
The Satanic Verses: सलमान रुश्दी की किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा 36 साल तक प्रतिबंध झेलने के बाद भारतीय किताबों की दुकानों में वापस आ गई है। विवादास्पद किताब की फिर से बिक्री ने कुछ मुस्लिम संगठनों को परेशान कर दिया है, जिन्होंने केंद्र सरकार से प्रतिबंध को फिर से लागू करने की अपील की है।
36 साल तक प्रतिबंध झेलने के बाद भारतीय किताबों की दुकानों में सलमान रुश्दी की किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' फिर से नजर आने लगी है। विवादास्पद किताब की फिर से बिक्री ने कुछ मुस्लिम संगठनों को परेशान कर दिया है, जिन्होंने केंद्र सरकार से प्रतिबंध को फिर से लागू करने की अपील की है।

आपको बता दें कि सलमान रुश्दी की किताब 1988 में प्रकाशित हुई थी और इसे लेकर पूरी दुनिया में भारी विरोध हुआ और उस वक्त पीएम रहे राजीव गांधी ने इसे बैन कर दिया था। आइए विस्तार से जानते हैं क्यों लगाया गया प्रतिबंध...
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
किताब की विषय-वस्तु को कई मुस्लिम संगठनों ने "ईशनिंदा" करार दिया। किताब में इस्लामी धर्म और पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी कुछ बातों को लेकर मुस्लिम समुदाय में गहरी नाराज़गी थी। भारत में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने 5 अक्टूबर 1988 को इस किताब के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना: कई मुस्लिम संगठनों ने किताब को इस्लाम-विरोधी बताया। उन्होंने दावा किया कि किताब में पैगंबर मोहम्मद और उनके साथियों का अपमान किया गया है।
बढ़ता विरोध और हिंसा
- भारत समेत कई देशों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।
- मुंबई में हुए मुस्लिम दंगों में 12 लोग मारे गए।
- तेहरान में ब्रिटिश दूतावास पर हमला हुआ।
- ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में लोगों ने किताब की प्रतियां जलाईं।
राजनीतिक दबाव
राजीव गांधी सरकार पहले से शाह बानो मामला और बोफोर्स घोटाले जैसे विवादों से जूझ रही थी। ऐसे में सरकार ने रूढ़िवादी मुस्लिम समुदाय को शांत करने के लिए यह कदम उठाया।
आलोचना और विवाद
राजीव गांधी सरकार के इस कदम को 'धार्मिक दबाव में लिया गया निर्णय' कहा गया। सलमान रुश्दी ने खुद राजीव गांधी को खुले पत्र में इस प्रतिबंध की निंदा की। आलोचकों का कहना था कि सरकार ने अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन किया।
कैसे खत्म हुआ प्रतिबंध?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को कहा कि 1988 में जारी अधिसूचना का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। कोर्ट ने यह मान लिया कि ऐसी कोई अधिसूचना अस्तित्व में थी ही नहीं।
मुस्लिम संगठनों की आपत्ति
पुस्तक की भारत में दोबारा बिक्री को लेकर कई मुस्लिम संगठन नाराज़ हैं। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने किताब को देश के सौहार्द के लिए खतरा बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किताब पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की अपील की।
सलमान रुश्दी और 'द सैटेनिक वर्सेज' का प्रभाव
रुश्दी का जीवन: 'द सैटेनिक वर्सेज' के कारण रुश्दी को जान से मारने की धमकियां मिलीं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया और सिर पर $30 लाख का इनाम रखा। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पुलिस सुरक्षा में रखा।
विवाद के बावजूद सफलता: रुश्दी ने कई प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं, जैसे 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन', जिसे बुकर पुरस्कार मिला। 2007 में ब्रिटेन की महारानी ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि दी।
'द सैटेनिक वर्सेज' पर प्रतिबंध का मामला धार्मिक भावनाओं, राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच का संघर्ष था। किताब पर विवाद खत्म नहीं हुआ है, और आज भी यह सवाल उठता है कि इस तरह के प्रतिबंध किसी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को कैसे प्रभावित करते हैं।
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