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The Satanic Verses: 36 साल बाद सलमान रुश्‍दी की किताब से हटा बैन, जानिए क्यों थी प्रतिबंधित?

The Satanic Verses: सलमान रुश्दी की किताब "द सैटेनिक वर्सेज" पर भारत में लगा प्रतिबंध 36 साल बाद समाप्‍त हो गया है। दिल्‍ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस किताब की भारत में बिक्री शुरू होते ही हंगामा मच गया है। बैन हटने के बाद भारत के बाजारों में ये इसकी बिक्री शुरू होते ही केंद्र की मोदी सरकार विरोधी पार्टियों कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों के निशाने पर आ चुकी है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में सलमान रुश्दी की इस किताब "द सैटेनिक वर्सेज" पर प्रतिबंध लगाया गया था। साढ़े तीन दशक बाद भारत में इस किताब से प्रतिबंध हटा दिया गया है। आइए जानते हैं आखिर सलमान रुश्‍दी की किताब में ऐसा क्‍या है जिसके कारण इसे भारत ही नहीं दुनिया भर में बैन किया गया था?

The Satanic Verses

बता दें सलमान रुश्‍दी भारतीय मूल के बिट्रिश-अमेरिकी उपन्‍यासकार हैं। 1981 में सलमान अपनी पहली उपन्‍यास मिडलानट चिल्‍ड्रेन के कारण खूब पॉपुलर हुए थे। इसके बाद 26 सिंतबर 1988 में अमेरिका में सलमान की ये "द सैटेनिक वर्सेज" प्रकाशित हुई थी और 1989 में अमेरिका के रैंडम हाउस ने सलमान की इस किताब का प्रकाशन किया।

The Satanic Verses लेखक रुश्दी के खिलाफ फतवा

इस किताब की बिक्री शुरू होते ही दुनिया भर में इसका विरोध शुरू हो गया। यहां तक ईरान ने सलमान रुश्दी की हत्‍या करने वाले को इनाम देने का फतवा जारी कर दिया था। दुनिया भर में इस किताब का विरोध होने के बाद भारत में इसके आयात और लाने पर तत्‍तकालीन राजीव गांधी सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

The Satanic Verses पर क्‍यों लगा था प्रतिबंध?

उपन्यास द सैटेनिक वर्सेज के लेखक सलमान रुश्दी पर आरोप था कि उन्‍होंने क‍थित तौर पर अपनी उपन्‍यास में पैंगबर की आलोचना की है और उनका अनादर किया है। लेखक सलमान पर अपनी उपन्‍यास में पैंगबर की आलोचना कर ईशनिंदा करने का आरोप लगा था।

The Satanic Verses की बिक्री पर कांग्रेस को मिला ये जवाब

इस पुस्‍तक से भारत में बैन हटने के बाद कांग्रेस इसकी आलोचना कर रही है। हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सलाहकार कंचन गुप्ता ने कहा "कांग्रेस अपनी कहानियों को गढ़ती है और मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, जिससे कल्पना सच हो जाती है, कि सलमान रुश्दी की पुस्तक द सैटेनिक वर्सेज को मुसलमानों के विरोध और दबाव के कारण 'प्रतिबंधित' किया गया था। यह सच नहीं है।" उन्‍होंने ये भी बताया कि इस किताब को रुश्दी के खिलाफ विरोध और कोई फतवा आने से भी पहले यू.के. में रिलीज होने के तुरंत बाद भारत में आयात करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध

जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम) की उत्तर प्रदेश इकाई के कानूनी सलाहकार मौलाना काब रशीदी और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास जैसे धार्मिक नेताओं ने पहले ही इसका विरोध किया है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में लिखी बातें इस्लामी मान्यताओं का अपमान करती है और भारत के सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकती है। रशीदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ऐसी विवादास्पद पुस्तक बेचना अस्वीकार्य है और संविधान की भावना के विपरीत है। इसी तरह, अब्बास ने सरकार से देश के सद्भाव के लिए संभावित खतरे पर जोर देते हुए प्रतिबंध को बरकरार रखने का आह्वान किया है।

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