करवा चौथ की पूजा आज रात 8:20 बजे
सुहाग से संबंधित सामान खरीदने के लिए महिलाएं दुकानों पर डटी रहीं। मिट्टी का करवा खरीदा। चंद्रमा के उदय होने पर पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश दत्त त्रिपाठी बताते हैं कि इस व्रत पर पूजन की विशेष विधि है। दिन भर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के वक्त चंद्रमा की पूजा कर पति के आरती का भी विधान शास्त्रों में है। कहते हैं कि चंद्रमा की रोशनी में मौजूद अमृत से पति को लंबी उम्र मिलती है। गणेश, भगवान शिव व गौरी की पूजा से सुखमय जीवन, सुखद परिवार व पति के कष्ट का विनाश होता है।
पुराणों के अनुसार कार्तिक वदी की चौथ को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। मिट्टी के करवे से अटूट धार छोड़ सुहागिनें चंद्रमा की पूजा करती हैं। पूरे दिन निराजल व्रती पत्नी को जल पिला कर पति व्रत का पारण कराते हैं।
कहते हैं कि नीलगिरी पर्वत पर एक बार अर्जुन तप करने गए थे। उस समय परिवार व अर्जुन पर मुसीबत आन पड़ी थी। भगवान कृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने करवा चौथ का व्रत रख पूजन किया तो कष्ट दूर हो गए। करवा चौथ पर महिलाएं इच्छानुसार किसी भी समय चंद्रमा का पूजन नहीं कर सकतीं। पूजन के लिए चंद्रमा का उदय होना जरूरी है।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मंगलवार को 8.04 बजे तक भ्रद्रा रहेगा। चंद्रमा के उदय का समय 8.20 बजे है। मतलब यह हुआ कि व्रती महिलाएं 8.20 बजे चंद्रमा निकलने के बाद ही पूजा कर सकेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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