आतंकियों ने जन्म से पहले ही उठा दिया बच्चे के सिर से बाप का साया, अनंतनाग में दीपू की हत्या की दर्दनाक कहानी
जम्मू कश्मीर के अनन्तनाग में आतंकियों ने दीपू कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी। दीपू अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसके पिता बीमार, भाई नेत्रहीन, पत्नी गर्भवती हैं।

आतंक का न कोई धर्म होता है और न ही वो किसी की मजबूरियों को समझता है। ऐसा ही एक मामला जम्मू कश्मीर के अनंतनाग से सामने आया, जहां सर्कस में काम करने वाले दीपू कुमार की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उसकी पत्नी गर्भवती थी जो जून में बच्चे को जन्म दे सकती है।
किसी नवजात के लिए वो लम्हा किसी अभिशाप से कम नहीं होता, जिसके जन्म से पहले ही उसके पिता का साया उससे छीन लिया जाए। मंडी इलाके के जंदलाट जिले के एक सर्कस में काम करने वाला दीपू कुमार जून में अपने बच्चे को देखने की मंशा लिए ही आतंकियों का शिकार हो गया।
शाम को बाजार से दूध लेने निकले दीपू कुमार की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना को लश्कर ए तैयबा से जुड़े संगठन के आतंकियों ने अंजाम दिया है। उधमपुर जिले के थियाल गांव में दीपू के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
दीपू अपने घर में कमाने वाला अकेला शख्स था। एक बीमार पिता जिन्हें कान से कम सुनाई देता है। एक नेत्रहीन भाई उसकी पत्नी और बच्चे सबकी जिम्मेदारी का बोझ दीपू कुमार के कंधे पर ही था। लेकिन, आतंकियों ने घर के कमाऊ बेटे की हत्या कर उस परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया।
स्थानीय निवासी शंकर दास ने बताया कि ये परिवार एक दशक पहले ही कठुआ जिले से आकर यहां बसा था। दीपू कुमार की मां का कुछ समय पहले ही निधन हो गया था। वहीं, बीमार पिता और नेत्रहीन भाई उसकी पत्नी बच्चे, अपनी पत्नी सभी की जिम्मेदारी निभाने वाला दीपू कुमार सर्कस में काम करके दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता था।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस आतंकी हमले की निंदा करते हुए घाटी में इस तरह की हत्याएं रोकने के लिए सख्त सुरक्षा कदम उठाने को कहा है। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने परिवार को सांत्वना देते हुए पांच लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।












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