Exit Poll 2023: तेलंगाना में पिछली बार से कम मतदान, क्यों केसीआर की हैट्रिक तय है?

Telangana Assembly Election Result 2023: तेलंगाना में ज्यादातर एजेंसियों के एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त दिखाई गई है। कुछ में ही त्रिशंकु विधानसभा या सत्ताधारी बीआरएस की हैट्रिक की संभावना जताई गई है।

लेकिन, अगर आम चुनावों के परंपरागत ट्रेंड और तेलंगाना में हुए पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और उनकी भारत राष्ट्र समिति (BRS) को अभी खेल से बाहर समझ लेना जल्दबाजी हो सकती है।

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तेलंगाना में 70.6% वोटिंग
चुनाव आयोग ने गुरुवार रात 11 बजे तक के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक इस बार तेलंगाना विधानसभा की कुल 119 सीटों पर 70.6% वोटिंग हुई है। मतदान का यह प्रतिशत 2018 की 73.37% वोटिंग से करीब 3% कम है।

चुनाव का ऐतिहासिक पैटर्न केसीआर के पक्ष में
भारतीय चुनावी इतिहास का यह पैटर्न रहा है कि अक्सर जब किसी सरकार के खिलाफ भारी एंटी-इंकंबेंसी होती है या जनता सरकार बदलकर दूसरे को मौका देना चाहती है तो वह ज्यादा संख्या में मतदान के लिए निकलती है। इस चुनावी सिद्धांत को मानें तो अबकी बार केसीआर की सरकार को लेकर तेंलगाना के मतदाताओं ने ऐसा गुस्सा नहीं दिख रहा है।

दिन भर की वोटिंग पर आधारित हैं एग्जिट पोल के आंकड़े
एक बात और गौर करने वाली बात है कि एग्जिट पोल के जो नतीजे अबतक जारी हुए हैं, वह मुख्य रूप से गुरुवार पूरे दिन चली वोटिंग के दौरान वोटरों के जवाब पर ही आधारित हैं। एक विश्वसनीय एजेंसी इंडिया टुडे-माय ऐक्सिस इंडिया अगले दिन 1 बजे तक तेलंगाना के एग्जिट पोल का आंकड़ा जारी नहीं कर पाया था।

7% वोटर किसे वोट डालकर आए?
गुरुवार शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग ने जो आंकड़े दिए थे, उसके अनुसार तब तेलंगाना में 64% से भी कम वोटिंग हुई थी। क्योंकि, इसके बाद में जो करीब 7% वोटिंग हुई है, वह निर्णायक हो सकती है। मतलब ये कि ज्यादातर एक्जिट पोल के आंकड़ों में अंतिम समय में वोटिंग करने वालों का उत्तर शामिल नहीं है!

अब अगर पिछले तीन चुनावों में राज्य का मतदान प्रतिशत और सत्ताधारी बीआरस को मिली विधानसभा सीटों या बढ़त का आकलन करें तो कहानी और साफ हो सकती है।

2018 और 2019 का वोटिंग ट्रेंड समझें
2018 में करीब 3 फीसदी ज्यादा मतदान होने पर बीआरएस को 119 में से 88 सीटें मिली थीं। वहीं 2019 के लोकसभा चुनावों में लगभग 62% ही वोटिंग हुई थी, फिर भी केसीआर की पार्टी ने राज्य की 71 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी।

हैदराबाद का वोटिंग ट्रेंड भी बीआरएस के खिलाफ नहीं?
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में वोटिंग के पैटर्न को देखने से तो और साफ हो जाता है कि तेलंगाना के मतदाताओं ने बदलाव के लिए वोट डाला है, इसकी गुंजाइश नजर नहीं आ रही है।

क्योंकि, चुनाव आयोग ने इस बार ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में मतदान के शर्मनाक प्रतिशत को बढ़ाने के लिए सारे दांव लगाए थे। लेकिन, लगता है कि इसमें वह बुरी तरह नाकाम रहा है।

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ग्रेटर हैदराबाद का इलाका तेलंगाना के लिए इस वजह से अहम है कि यहां विधानसभा की 24 सीटें हैं। 2018 में इनमें से सभी सीटों पर मतदान का औसत 40 से 50 प्रतिशत के बीच रहा था।

इस बार चुनाव आयोग ने गुरुवार रात 11 बजे जो आंकड़े दिए, उसके अनुसार यहां औसतन 46.5% मतदान हो पाया है। यह राज्य के औसत मतदान से करीब 24% कम है।

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