तेलंगाना चुनाव: BRS ने कैंपेन रणनीति में किया बदलाव, इन फैक्टर पर कर रही है फोकस
तेलंगाना विधानसभा चुनावों में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है। ऐसे में मौजूदा बीआरएस ने अपनी अभियान रणनीति में बदलाव किया है। विपक्ष के साथ बयानबाजी की लड़ाई में शामिल होने के बजाय अपने मजबूत पक्ष के साथ लड़ने की योजना बनाई है। बीआरएस ने कांग्रेस के पक्ष में किसी भी वोट ब्लॉक, जाति, समुदाय, लिंग या उम्र के एकीकरण को रोकने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है।
बीआरएस अब तक ज्यादातर बैकफुट पर थी। उसका कैंपेन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित हो गया था। मेदिगड्डा बैराज के स्तंभों को नुकसान, कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना का एक हिस्सा, सत्ता विरोधी लहर और "वंशवाद की राजनीति" पर घिरी हुई है और कांग्रेस द्वारा लगातार बीआरएस-भाजपा सांठगांठ का आरोप लगाए जा रहे हैं।

चुनावों से पहले अपने अंतिम प्रयास में बीआरएस ने एक सुधार किया है। उसका ध्यान अब लक्षित समुदाय तक पहुंच और एक मजबूत ऑन-ग्राउंड चुनाव प्रबंधन प्रणाली पर केंद्रित है। बीआरएस नेता बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुंच रहे हैं और संचार के एक खुले चैनल का आश्वासन दे रहे हैं।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव की एक कथित ऑडियो क्लिपिंग वायरल हुई है। जिसमें वे मंत्री से यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि, वह सप्ताह में कम से कम दो दिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहेंगे। ये भी निर्देश दिए हैं कि, मंत्री आश्वासन दें कि, जो अतीत में हुआ वह दोबारा नहीं होगा।
इसके अलावा केटीआर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और बेरोजगार युवाओं के प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। हाल ही में केटीआर को हैदराबाद के अशोक नगर पहुंचे। जहां उन्होंने सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के साथ बातचीत की और नौकरी कैलेंडर तैयार करने के लिए चुनाव के बाद उनसे मिलने का वादा किया।
बीआरएस कांग्रेस के वोट बैंक को ब्लॉक करने पर भी काम कर रही है। बीआरएस नेता कई ऐसे समुदायों के साथ मिल रहे हैं। जो बड़ा वोट बैंक रखते हैं। केटीआर की कलवारी मंदिर फाउंडेशन चर्च की हालिया यात्रा इसका उदाहारण है। जिससे तीन लाख लोग जुड़े हुए हैं।












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