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तेलंगाना चुनाव में बीजेपी का मुख्य राजनीतिक दुश्मन कौन?

तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर जो ओपिनियन पोल आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि मुकाबला सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति (BRS) और कांग्रेस में है। बीजेपी को लड़ाई में नहीं दिखाया जा रहा है।

हालांकि, अपने स्तर पर बीजेपी काफी कोशिश कर रही है और शहरी इलाकों में उसका जनाधार बढ़ा भी है, लेकिन वह चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंद्वी है, यह फिलहाल नहीं कहा जा सकता। हालांकि, इतना तय है कि बीआरएस और कांग्रेस में से उसके निशाने पर पहले केंद्र की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ही है।

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हैदराबाद निकाय चुनाव से बढ़ा था भाजपा का उत्साह
2020 में हैदराबाद निकाय चुनाव के परिणाम से भाजपा का उत्साह जरूर बढ़ा था, लेकिन शहरी इलाकों के अलावा दूर-दराज वाले इलाकों में अभी भी उसे अपनी पकड़ बनाने के लिए काफी मेहनत करनी है। खासकर कर्नाटक के चुनाव परिणाम ने इसके उत्साह को पहले से कम कर रखा है।

बीआरएस-विरोधी वोट पर बीजेपी की नजर
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी फिर भी राज्य की सभी 119 विधासभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में जुटी हुई। जिन क्षेत्रों में उसकी खास मौजूदगी नहीं है, पार्टी उसे भी नजरअंदाज नहीं कर रही है। बीजेपी का काफी दारोमदार सत्ताधारी बीआरएस के खिलाफ 9 वर्षों में तैयार हुई एंटी-इंकंबेंसी वाले वोटो पर है।

त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस को ज्यादा नुकसान
मतलब, भाजपा बीआरएस सरकार-विरोधी जितने वोटों में सेंध लगाएगी, कांग्रेस के मंसूबों पर उतना पानी फिरता जाएगा। क्योंकि, एंटी-इंकंबेंसी वाले वोट बंटने का असली फायदा केसीआर की पार्टी को ही मिलेगा। जबकि, सीधे मुकाबले में कांग्रेस उसे ज्यादा कड़ी टक्कर दे सकती है। पार्टी के रणनीतिकारों का भी कहना है उनकी नजर बीआरएस सरकार-विरोधी वोटों को अधिक से अधिक अपने पाले में करने की है।

दअरसल, भाजपा की रणनीति का सीधा मायने ये है कि इससे कांग्रेस की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी इस रणनीति पर काम कर रही है कि जिस विधानसभा सीट पर उसे कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं मिलेगा, वहां वह किसी मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार को भी समर्थन दे सकती है।

भाजपा की नजर 2024 के लोकसभा चुनावों पर
बात साफ है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए तेलंगाना विधानसभा चुनाव से बड़ी चुनौती 2024 का लोकसभा चुनाव है, जहां उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस है। इसलिए अगर उसे दो में से किसी एक को टारगेट करना होगा तो कांग्रेस पहले नंबर पर होगी, जिससे 2024 में उसे मुकाबला करना है।

मुस्लिम वोटों पर भी भाजपा की नजर
तेलंगाना में कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक की भूमिका में हैं। बीजेपी की यह भी कोशिश है कि मुसलमान वोट कांग्रेस के बजाए, बीआरएस के खाते में जाए। इसलिए पार्टी केसीआर की पार्टी से नजदीकी वाली धारणा को भी तोड़ने में जुटी हुई है।

पिछले हफ्ते जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना की सभा में बीआरएस नेताओं को निशाना बनाया था और फिर बीआरएस ने पलटवार किया था तो उन बातों को भी इसी धारणा को तोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस लंबे वक्त से बीजेपी-बीआरएस में सेटिंग के दावे कर रही है। लेकिन, जिस तरह से हाल में भाजपा और बीआरएस के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं, उससे यही संदेश गया है कि कांग्रेस के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

दरअसल, भाजपा की लंबी राजनीति में कमजोर बीआरएस की तुलना में कमजोर कांग्रेस ज्याद सूट करती है। इसलिए, प्रदेश में पार्टी की अबतक की रणनीति से स्पष्ट लग रहा है कि वह भविष्य के लिए अपना जनाधार बढ़ाने में तो जुटी ही हुई है, कांग्रेस से कर्नाटक का चुनावी बदला लेने के लिए भी पूरा जोर लगा रही है।

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