तेलंगाना विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए आसान नहीं, मिल रही कड़ी चुनौती
तेलंगाना चुनाव के दौरान एक बार फिर तेलंगान मुक्ति आंदोलन और नए राज्य के गठन प्रयासों को चर्चा हो रही है। एक ओर बीआरएस खुद तेलंगाना के गठन का क्रेडिट लेना चाहती है। वहीं दूसरी कांग्रेस भी ऐसा ही दावा कर रही है। इन सब के बीच कांग्रेस इस बार चुनाव में बीआरएस के सामने कितना टिक पाएगी, इसको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
वर्ष 2014 में तेलंगाना चुनाव के परिणामों का जिक्र जरूर होगा, क्योंकि राजनीतिक दलों के मौजूदा स्थिति की तुलना तभी संभव है, जब पिछले चुनाव परिणाम सामने हों। तेलंगान के बाद अगले साल आंध्र प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सवाल है क्या वहां कांग्रेस 2024 के विधानसभा चुनाव में अपना कर्नाटक विजय मॉडल आंध्र प्रदेश में दोहरा सकती है?

कांग्रेस क्या आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी सरकार को उखाड़ सकती है? अगर ऐसा हुआ तो ये बहुत बड़ा उलटफेर होगा। दरअसल ये एक मजाक सा लगता है। वजह साफ है क्योंकि 2014 और 2019 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को आंध्र प्रदेश में एक भी सीट नहीं मिली।
वहीं 2014 में टीडीपी ने सत्ता हासिल की और 2019 में वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश की सरकार आई। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि 2024 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के हाथ एक बार फिर से खाली रहेंगे।
कांग्रेस अपने कर्नाटक मॉडल को आंध्र प्रदेश में नहीं दोहरा सकती। लेकिन क्या ग्रैंड ओल्ड पार्टी अब तेलंगाना विधानसभा चुनाव में ऐसा कर पाएगी? कांग्रेसी दुनिया को यही बात समझा रहे हैं। उनका कहना है कि पांच गारंटियों का वादा (यहां एक और गारंटी के साथ) तेलंगाना में पार्टी के लिए चमत्कार कर रहा है, जबकि कर्नाटक की जीत ने उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को उत्साहित किया है और इस राज्य में लोगों को उत्साहित किया है।
वहीं दूसरी ओर 2014 को याद करने से कड़वी यादें ताजा हो सकती हैं। जब पार्टी की ओर से ये वादा किया जा रहा है कि तेलंगाना राज्य का गठन करने उसने अपना वादा पूरा किया है।
2018 में महागठबंधन न सिर्फ कांग्रेस बल्कि टीडीपी के लिए भी सही नहीं रहा। वर्ष 2014 और 2018 में विधानसभा चुनावों में लगातार हार ने कांग्रेसियों के बीच बहुत निराशा और घबराहट पैदा कर दी थी। 2018 में तत्कालीन टीपीसीसी अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी ने कांग्रेस को सत्ता में लाने तक अपनी दाढ़ी नहीं काटने का वादा किया था। लेकिन उनकी प्रतिज्ञा पूरी नहीं हो पाई।












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