सूर्यकुमार यादव की बैटिंग पर ज़्यादा ही निर्भर तो नहीं हो गई है टीम इंडिया

सूर्यकुमार यादव
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मंगलवार को नेपियर में भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच सिरीज़ का तीसरा और आख़िरी टी-20 मैच खेला जाएगा.

जहा पहला मैच बारिश में धुल गया था, वहीं दूसरे मैच में सूर्यकुमार यादव के शानदार शतक की मदद से भारत को बड़ी जीत मिली थी.

अब तीसरे मैच को जीतकर हार्दिक पंड्या की भारतीय टीम के पास सिरीज़ को जीतने का मौका है. लेकिन प्रयोग के दैर से गुजर रही भारतीय टीम जानती है कि श्रृंखला जीतने के अलावा भी टीम ने कुछ टार्गेट सेट किए हैं जिसका नतीजा अभी भी टीम के पक्ष में नहीं आया है.

दरअसल हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुए टी20 वर्ल्ड कप में सेमीफ़ाइनल से छुट्टी ने टीम मैनेजमेंट को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

एक साल पहले के वर्ल्ड कप में पहले राउंड में बाहर होने के बाद टीम इस बार कमाल करना चाह रही थी लेकिन नतीजा सिफ़र ही रहा.

टूर्नामेंट से सबक लेकर टीम इंडिया न्यूज़ीलैंड में युवा खिलाड़ियों के साथ अपने खेल में कुछ बदलाव देखना चाह रही है. हालांकि एक मैच में उन्हें जीत मिली है लेकिन खेल के अप्रोच में जो परिवर्तन की उम्मीद थी वो अभी नज़र नहीं आया है.

पावरप्ले में दम नहीं

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ऑस्ट्रेलिया में हार की सबसे बड़ी वजह थी बैटिंग पावरप्ले का समुचित उपयोग ना कर पाना था. इस टूर्नामेंट में पावरप्ले में भारतीय टीम से कम रन सिर्फ़ यूएई की टीम ने ही बनाया था.

जहां वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा और केएल राहुल ओपनिंग कर रहे थे, वहीं इस सिरीज़ में उन्हें आराम दिया गया और उनकी जगह ऋषभ पंत और ईशान किशन ओपनिंग करने आए.

दूसरे टी20 पावरप्ले में भारत का स्कोर रहा एक विकेट खोकर 42 रन जो बहुत ज्यादा आत्मविश्वास बढ़ाने वाला नहीं था.

भारतीय टीम को इंग्लैंड के उस अप्रोच को कॉपी करने की ज़रूरत है जिसमें इंग्लिश बल्लेबाज़ पहली गेंद से ही हमला बोल देते हैं और विकेट गिरने पर भी वो स्कोरिंग रेट गिरने नहीं देते है.

लेकिन इस मैच में भी पुरानी भारतीय टीम दिखाई दी, खासकर पंत की बैटिंग में, जो शुरू में विकेट बचाकर खेलना चाहती है.

पंत की जगह पर उठेंगे सवाल

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सफेद बॉल की क्रिकेट में ऋषभ पंत का भारतीय टीम में क्या रोल है इसपर टीम मैनेजमेंट भी कन्फ़्यूज़ हैं और ज़ाहिर है पंत भी दुविधा में हैं.

वर्ल्ड कप में दिनेश कार्तिक को पंत के पहले तरहीज दी गई और जब वो चार मैचों में कुछ खास नहीं कर पाए तो पंत की टीम में एंट्री हुई, पहले बतौर बल्लेबाज़ और बाद में बल्लेबाज़-कीपर के तौर पर.

बैटिंग ऑर्डर में पंत को नंबर 6 या 7 पर खेलने का मौका मिला, हार्दिक पंड्या के बाद ही उनका नंबर आया. उन दो मैचों में पंत का बल्ला खामोश ही रहा.

कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पंत को पक्का खिलाना चाहिए और वो भी टॉप ऑर्डर में क्योंकि वो एक मैच-जिताऊ खिलाड़ी हैं.

न्यूज़ीलैंड में उन्हें ओपनिंग का मौका मिला लेकिन ऐसा लगा कि वो किसी मानसिक बोझ के तले दबे हैं और खुलकर अपने अंदाज़ में खेल नहीं पा रहे हैं.

उन्होंने 13 गेंदों पर 6 रन बनाए और फर्ग्युसन की गेंद को स्लैश करने के चक्कर में हवा में खेल बैठे और कैच आउट हुए. अपना फेवरिट शॉट लगाते हिए उनकी नजरें गेंद पर टिकी नहीं थी जिससे उन्हें नुकसान हो गया.

वैसे अगर पंत के स्ट्राइक रेट पर नज़र डालेंगे तो पाएंगे कि उनके स्ट्राइक रेट में पिछले दो-एक साल में गिरावट आई है और इसमें आईपीएल के फिगर्स भी शामिल हैं.

पंत के साथ ईशान किशन ने ओपनिंग की जिन्होंने 31 बॉल पर 36 रन बनाए. किशन भी विकेटकीपर बैट्समैन हैं और पंत जानते हैं कि एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकती.

पंत के पास एक और मौका है आने वाले सेलेकटर्स को इंप्रेस करने का. अगर इस पारी में वो दमदार बैटिंग नहीं करते हैं तो रोहित और राहुल के आने के बाद वो टीम में अपनी दावेदारी कैसे पेश कर पाएंगे देखना होगा.

बल्लेबाज़ों को भी लेनी पड़ेगी बोलिंग की ज़िम्मेदारी

भारतीय बल्लेबाज़
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भारतीय बल्लेबाज़

मॉडर्न टी20 क्रिकेट बहुत बदल चुका है और इसमें खिलाड़ियों पर सभी विधाओं में पारंगत होने का दबाव होता है. अगर वर्ल्ड चैंपियन इंग्लैंड की ही टीम पर नज़र डाले तो पाएंगे की उनके पास ऑलराउंडर की भरमार है और लगभग सभी बैटर्स बोलिंग भी कर सकते हैं.

भारतीय टीम के प्योर बैट्समैन से भी उम्मीद है कि वो 2-3 ओवर गेंदबाज़ी भी कर सके. ज़रूरी नहीं है कि हर मैच में उन्हें बोलिंग करनी पड़े लेकिन जब ज़रूरत पड़े तो उन्हें तैयार रहना चाहिए.

दूसरे मैच के बाद कप्तान हार्दिक पंड्या ने भी इस ओर इशारा किया कि आने वाले समय में वो कम बोलिंग करेंगे और उन्हें बल्लेबाज़ों से उम्मीद है कि वो भी आगे आए और कुछ ओवर्स डालें. उनसे पहले मैच की कमेंट्री के दौरान भी साइमन डूल ने श्रेयस अय्यर की और इशारा करते हुऐ हैरानी जताई कि उन्होंने 2-3 ओवर ऑफ़ स्पिन के क्यों नहीं डाले जब हार्दिक पंड्या ने भी कुछ बोलिंग नहीं की.

सूर्यकुमार पर अत्यधिक निर्भरता

वैसे इस समय भारतीय क्रिकेट में सूर्यकुमार को बोलबाला चल रहा है. यहां तक की भारत के पॉलिटिकल कमेंट्री में भी देश के अजेय रहने वाले कुछ बड़े नेताओं की तुलना सूर्यकुमार की बैटिंग से की जा रही है.

दूसरे टी-20 में जिस तरह उन्होंने शतक ठोका और 51 गेंदों पर 111 नाबाद रन बनाए की उनके विपक्षी भी तारीफ़ें करते नज़र आए.

न्यूज़ीलैंड के कोच गैरी स्टेड ने कहा, “हम सबने उनके शॉट्स को हैरत के साथ देखा. उनके उपर हमने टीम मीटिंग में चर्चा की है और मैच से पहले भी हम बात करेंगे कि किस तरह उनकी बैटिंग को रोका जाए.”

असली तारीफ़ वही होती है जौ दुश्मनों की ओर से आए, सूर्यकुमार ने ये मकाम तो हासिल कर लिया है लेकिन भारतीय टीम के लिए डर ये है कि कहीं उनकी सबसे बड़ी मज़बूती ही उनकी कमज़ोरी ना बन जाए.

टीम नहीं चाहेगी कि वो पूरी तरह से स्काई की बैटिंग पर ही निर्भर रहे इसलिए ज़रूरी है की दूसरे बल्लेबाज़ भी आगे आएं और तेज़तर्रार बैटिंग का परिचय दे और स्कोर को आख़िरी ओवर्स में बड़ा करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सूर्यकुमार के कंधों पर ही ना छोड़ दें.

नेपियर में खेले जाने वाले इस मैच में मेडिकल कारणों से न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन नहीं खेलेंगे.

उनकी जगह टिम साउदी कप्तानी करेंगे जिन्होंने पिछले मैच के आखिरी ओवर में हैट्रिक लिया था. न्यूज़ीलैंड की टीम में भी कुछ मुद्दे हैं जिन्हें वो सुलझाना चाहेंगे.

विलिमसन की जगह मार्क चैपमैन नम्बर तीन पर खेलते नज़र आ सकते हैं. वहीं कीवी टीम को ओपनर डेवन कॉन्वे से तेज़ रनों की दरकार होगी. वहीं छठे नंबर पर बैटिंग करने वाले जिमी नीशम भी पिछली कई पारियों में बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाए हैं. न्यूज़ीलैंड को उम्मीद होगी की नीशम वैसी ही अटैकिंग क्रिकेट खेले जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

जहां तक भारतीय टीम का सवाल है, टीम में किसी परिवर्तन की उम्मीद नही है और वही ग्यारह खेलेंगे जिन्होंने पिछले मैच में बड़ी जीत हासिल की थी. भारतीय टीम को जीत की तो उम्मीद है ही, साथ ही सिरीज़ के इस आखिरी मैच में कम से कम एक-दो सवालों के जवाब मिलने की भी उम्मीद है जो टीम इंडिया को परेशान कर रही है.

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