Teachers Day Shlok: टीचर्स डे पर अपने गुरु को भेजें ये संस्कृत श्लोक, हर लाइन में झलकेगी शिक्षक की महानता
Teachers Day 5 September 2025, Sanskrit Shlok: आज यानि शुक्रवार को शिक्षक दिवस है, जोकि हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन हम अपने गुरुओं और शिक्षकों को सम्मान देने के लिए मनाते हैं। गुरु हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। वे हमें ज्ञान देते हैं और सही रास्ता दिखाते हैं। इस खास मौके पर चलिए जानते हैं कुछ श्लोक, मंत्र और दोहे जो गुरु के महत्व को बताते हैं।
भारत में शिक्षक दिवस हर साल पांच सितंबर को मनाया जाता है, क्योंकि यह डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म का दिन है। राधाकृष्णन का जन्म पांच सितंबर 1888 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था।

राधाकृष्णन न केवल महान शिक्षक थे, बल्कि विद्वान दार्शनिक और राजनीतिज्ञ भी थे। डॉ. राधाकृष्णन भारत के पहले उप-राष्ट्रपति (1952-62) और दूसरे राष्ट्रपति (1962-67) बने। यही कारण है कि इस दिन हम अपने गुरुओं को सम्मान और धन्यवाद देते हैं।
शिक्षक दिवस श्लोक (Teachers Day Shlok)
सनातन धर्म में गुरु को बहुत बड़ा सम्मान मिला है। शास्त्रों में कहा गया है:
- "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"
अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं। गुरु साक्षात परम ब्रह्म हैं। ऐसे गुरु को हमारा नमस्कार।
- "गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।"
अर्थ: जब गुरु और भगवान दोनों आपके सामने हों, तो पहले गुरु को सम्मान देना चाहिए। क्योंकि गुरु ही हमें भगवान तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं।
- "त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥"
अर्थ: गुरु ही माता, पिता, भाई, सखा और विद्या हैं। गुरु ही हमारे जीवन का सब कुछ हैं।
- "ॐ गुरवे नमः"
अर्थ: गुरु को मेरा प्रणाम। यह छोटा सा मंत्र बोलकर हम अपने गुरु को सम्मान देते हैं।
- "सर्वज्ञानप्रदं गुरुम्"
अर्थ: गुरु ही वह हैं जो हमें हर तरह का ज्ञान देते हैं। गुरु पढ़ाई, अच्छे संस्कार और सही रास्ता दिखाने में हमारी मदद करते हैं।
- "गुरोः चरणकमलं साधु-सत्कृते नमामि"
अर्थ: मैं गुरु के चरणों को नमन करता हूं, जिन्होंने मुझे अच्छा और सही ज्ञान दिया। गुरु के चरणों में अपना सिर झुकाना और उनका सम्मान करना हमें सीख देता है कि ज्ञान का आदर कैसे किया जाता है।
- "गुरु शरणं"
अर्थ: मैं अपने गुरु की शरण में हूं। गुरु हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं, इसलिए हम हमेशा उनके सिखाए रास्ते पर चलें।












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