तहलका यौन उत्‍पीड़न मामले की जांच कर सकता है महिला आयोग

Tarun Tejpal
नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने गुरुवार को कहा कि समाचार पत्रिका तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल द्वारा एक महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला यदि उनके समक्ष उठाया जाता है, तो वह मामले की जांच करेगा। महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा, "एक बार मामला राष्ट्रीय महिला आयोग के पास लाया जाए, तो हम जांच कर यह सुनिश्चित करेंगे कि आरोपी दोषी पाया जाता है, तो उसे सजा हो।

उसे अदालत में पेश होना पड़ेगा। शर्मा ने तेजपाल द्वारा तहलका के मुख्य संपादक के पद से छह महीने के लिए त्यागपत्र देने की घोषणा पर कहा कि तरुण तेजपाल भगवान नहीं हैं, जो खुद अपनी करनी की सजा तय करेंगे। तहलका की प्रबंधक संपादक शोमा चौधरी ने बुधवार को पत्रिका के सभी कर्मचारियों को तेजपाल का संलग्न खत ई-मेल किया। तरुण तेजपाल तहलका के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं।

तेजपाल ने इससे पहले शोमा चौधरी को ई-मेल में लिखा है कि समझदारी की चूक और परिस्थिति की गलत व्याख्या के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई, जो हमारे विश्वास और संघर्ष के खिलाफ है। उन्होंने लिखा कि मैं पहले ही अपने दुर्व्यवहार के लिए बिना शर्त क्षमा मांग चुका हूं, लेकिन मुझे लगता है कि अभी प्रायश्चित बाकी है। इसलिए मैं तहलका के मुख्य संपादक के पद से और कार्यालय से अगले छह महीने के लिए हटने की पेशकश कर रहा हूं।

चौधरी ने संस्था में काम करने वाले साथियों से मुश्किल की इस घड़ी में सहयोग करने का आग्रह किया। पूर्व पुलिस अधिकारी और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने घटना को बहुत बड़ी भूल कहा। बेदी ने कहा कि कानून की दृष्टि से इस मामले में दो तरह के कदम उठाए जा सकते हैं, पहला तो यह कि तहलका की यौन उत्पीड़न समिति के सामने यह मामला रखा जाए, यदि तहलका में ऐसी कोई समिति है तो और मामले की विस्तृत जांच हो।

दूसरा यह कि पुलिस अपने विवेक के आधार पर संज्ञान ले और मामले की पूरी छानबीन करे, उस स्थिति में भी यदि पीड़िता प्राथमिकी दर्ज करने को तैयार न हो। बेदी ने कहा कि इससे पता चलता है कि भारतीय समाज में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं। सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव ने कहा कि यदि पीड़िता प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है, तब भी तरुण तेजपाल को तहलका के संपादक पद पर नहीं लौटना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार और द हिंदू के पूर्व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस मामले को एक निजी मामले की तरह लिया जाना चाहिए। आरोपी सिर्फ कार्यालय से अपना पद छोड़कर इतनी आसानी से छूट नहीं सकता।

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