तंदूरी चिकेन, मटन कोरमा......श्रीनगर के सेंटूर होटल में क्या ऐसे कट रहा है कश्मीरी नेताओं का वक्त

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से मुख्यधारा के कई नेता और अलगाववादियों को श्रीनगर के आलीशान सेंटूर होटल में हिरासत में रखा गया है। फिलहाल यह होटल करीब 50 ऐसे नेताओं के लिए अस्थाई जेल बना हुआ है। यहां बंद कश्मीरी नेताओं को पिछले 4-5 अगस्त से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला है। इस दौरान बकरीद भी मनाई जा चुकी है। लेकिन, क्या वास्तव में यहां रह रहे नेता पूरी तरह से जेल के कैदियों वाला जीवन जीने को मजबूर हैं? ऐसा लगता नहीं है। इतने दिनों बाद अब जब रिश्तेदारों को इनसे मिलने की इजाजत दी जा रही है तो होटल के अंदर से कुछ बेहद ही महत्वपूर्ण खबरें भी छनकर बाहर निकल रही हैं। अगर इन खबरों पर यकीन करें तो होटल के अंदर पूरी तरह से जेल वाला जीवन कतई नहीं है। जो नेता जेब से पैसे ढीले कर रहे हैं, उन्हें लजीज खानों का लुत्फ उठाने का मौका जरूर मिल ही रहा है।

अस्थाई जेल में कैसी हो रही है खातिरदारी?

अस्थाई जेल में कैसी हो रही है खातिरदारी?

कश्मीर में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के बाधित होने से ज्यादातर लोगों को कानों-कान मिलने वाली खबरों पर ही यकीन करना पड़ रहा है। जाहिर है कि कश्मीरियों को उन नेताओं के दिनचर्या के बारे में जानने की सबसे ज्यादा उत्सुकता है, जो पिछले 4-5 अगस्त से हिरासत में रखे गए हैं। भले ही कुछ लोग उनके प्रति बेहद सहानुभूति रखते हों या उनसे नफरत करते हों, लेकिन सरकारी मेहमान के रूप में उनकी खातिरदारी कैसी हो रही है, इसके बारे में जानने की इच्छा रहना स्वाभाविक ही है। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक उसे होटल के कर्मचारी होने का दावा करने वाले एक शख्स ने अंदर की कुछ दिलचस्प, लेकिन महत्वपूर्ण सूचना दी है। उस होटल कर्मचारी की बातचीत से लगता है कि वह 5 अगस्त से जेल के अलग-अलग कमरों में रखे गए कम से कम 37 नेताओं के बारे में पक्की जानकारी रखता है। हालांकि, एचटी के मुताबिक वह दावों की अलग से पुष्टि नहीं कर पाया है।

पैसे खर्च करो, लजीज खाना खाओ

पैसे खर्च करो, लजीज खाना खाओ

होटल कर्मचारी की मानें तो वह इतने दिनों में हर नेता के पसंदीदा खाने और छोटी-मोटी आदतों से पूरी तरह वाकिफ हो चुका है। इस दौरान उसने जम्मू और कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन के बारे में जो रोचक जानकारी दी वह बहुत ही खास है। उसने विशेष तौर पर उनके खाने पर फोकस किया है। उसने बताया कि, 'सज्जाद लोन तंदूरी चिकेन मंगवाना पसंद करते हैं......वे खाने के बड़े शौकीन हैं। वह रोजाना 1,000 रुपये खर्च करते हैं, क्योंकि यहां अलग से खाना ऑर्डर करने के लिए आपको अलग से कैश देने पड़ते हैं।' यही नहीं उसने ये भी बताया कि ईद का खाना पारंपरिक तौर पर तो विस्तार से आयोजित नहीं किया गया था, लेकिन हिरासत में रखे गए एक शख्स ने सबके लिए मटन डिश दनिया-कोरमा का ऑर्डर दिया था।

कैदियों को विशेष सुविधा भी मिली है

कैदियों को विशेष सुविधा भी मिली है

अगर आप सोच रहे होंगे कि जेल में जब अलग से खाना ऑर्डर करने के लिए कैश में पैसे देने पड़ते हैं, तो ये नेता उसका इंतजाम कहां से करते हैं। लेकिन, सेंटूर होटल में एटीएम भी है और इन नेताओं को पैसे निकालने में दिक्कत नहीं होती है। यही नहीं, सज्जाद लोन के साथ-साथ नेशनल कांफ्रेंस के नेता अली मोहम्मद सागर और पूर्व मंत्री इमरान रेजा अंसारी को निजी सेवक के साथ अलग-अलग रूम की सुविधा दी गई है। हालांकि, सूचना के मुताबिक बंदियों को खाने के समय के अलावा कभी भी आपस में मिलने की इजाजत नहीं है। ये लोग सिर्फ सुबह के नाश्ते (सुबह 8.15 ), लंच (दोपहर 1.00 बजे ) और डिनर (रात 9 बजे) पर ही मिल पाते हैं, जिसके समय का कड़ाई से पालन होता है।

झड़प के बाद बढ़ी चौकसी

झड़प के बाद बढ़ी चौकसी

मुखबिर ने ये भी बताया कि नेताओं को आपसी भिड़ंत से रोकने के लिए सुरक्षा का कड़ा पहरा रखा जा रहा है। उसके मुताबिक, 'एक दिन तो झड़प हो गया था, खून भी निकला था, इसलिए सुरक्षा को ज्यादा अलर्ट कर दिया गया है।' गौरतलब है कि पहले दो पूर्व मुख्यमंत्रियों पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला को भी सरकारी गेस्ट हाउस हरि निवास में ही रखा गया था। लेकिन, एक दिन दोनों नेताओं में हुई जुबानी जंग के बाद महबूबा को हरि निवास से हटाकर शानदार चश्मे शाही में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि, उमर शानदार बागों के बीच बने हरि निवास में ही रखे गए हैं।

बंदियों से मिलने रोजाना पहुंच रहे हैं घर वाले

बंदियों से मिलने रोजाना पहुंच रहे हैं घर वाले

एक बात ये भी सामने आ रही है कि जब से कोर्ट ने जेल मैनुअल के हिसाब से रिश्तेदारों को बंदियों से मिलने देने को कहा है, वहां रोजाना परिवार वाले और नाते-रिश्तेदार भी पहुंच रहे हैं। इसके चलते उनके जरिए भी जेल के अंदर की घटनाएं छन-छन कर बाहर पहुंच रही हैं। फिलहाल इस सब्सिडियरी जेल को घाटी की सुरक्षा के इंचार्ज डीएसपी को इस अस्थाई जेल का सुप्रीटेंडेंट बनाया गया है। जो कि कहने के लिए तो जरूर जेल है, लेकिन वहां कई सुविधाएं तो शानदार होटल वाली पहले से ही मौजूद हैं ही।

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