Tamil Nadu Stampede: विजय की करूर रैली के पीड़ित परिवारों के लिए CM स्टलिन ने 10 लाख के मुआवजे का किया ऐलान
Tamil Nadu Stampede: तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) पार्टी के अध्यक्ष थलपति विजय की चुनावी रैली के दौरान हुए दुखद हादसे में 38 लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक घायल हो गए। इस घटना से पूरे तमिलनाडु में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने तुरंत राहत उपायों की घोषणा करते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
यह दुखद घटना तब हुई जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की रैली में भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए मृतकों के परिजनों के लिए ₹10 लाख और घायलों के लिए ₹1 लाख के मुआवजे की घोषणा की।

करूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे CM स्टालिन, घायलों से की मुलाकात
करूर में मृतकों के परिजनों से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का दौरा किया। वहां उन्होंने भगदड़ की घटना में घायल हुए लोगों से भेंट कर उनका हालचाल लिया। डीजीपी जी. वेंकटरमण के अनुसार, इस हादसे में अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।
उन्होंने तिरुचिरापल्ली, सलेम और डिंडीगुल के जिला कलेक्टरों को तुरंत करूर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया। आपातकालीन चिकित्सा दल सक्रिय कर दिए गए हैं और घायल लोगों के इलाज के लिए अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
भगदड़ के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के दिए गए आदेश
स्टालिन ने भगदड़ के कारणों का पता लगाने के लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन करेंगी, जिन्होंने पहले 2018 की थूथुकुडी पुलिस गोलीबारी की जांच का नेतृत्व किया था।
यह आयोग भीड़ प्रबंधन की समीक्षा करेगा, सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगा और चश्मदीदों के बयान दर्ज करेगा। इसका उद्देश्य जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निवारक उपायों की सिफारिश करना है।
हालांकि बचाव और राहत कार्य जारी हैं, टीवीके और विजय की ओर से अभी तक इस त्रासदी पर कोई बयान नहीं आया है। उनकी चुप्पी ने सबका ध्यान खींचा है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और राजनीतिक रैलियों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बेहतर उपायों का इंतजार कर रहे हैं।
करूर रैली में हुई भगदड़ तमिलनाडु के इतिहास में राजनीतिक सभाओं की सबसे घातक त्रासदियों में से एक है। इस घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और सरकारी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।












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