Tamil Nadu: विधानसभा में हुआ संविधान और राष्ट्रगान का 'अपमान'! सदन को संबोधित किए बिना निकले गवर्नर
Tamil Nadu: तमिलनाडु में राज्यपाल आरएन रवि से जुड़ी एक घटना के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उन्होंने डीएमके सरकार द्वारा संविधान और राष्ट्रगान का 'अनादर' करने का आरोप लगाते हुए विधानसभा से अपना संबोधन दिए बिना ही चले गए। इसके कारण डीएमके ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रवि के कार्यों को 'बचकानी' कहकर आलोचना की और उन पर लोगों, चुनी हुई सरकार और विधानसभा का अपमान करने का आरोप लगाया।
विवाद राज्य गीत "तमिल थाई वज़्थु" के इर्द-गिर्द है। रवि का दावा है कि वह इसका सम्मान करते हैं और इसे श्रद्धा के साथ गाते हैं। हालांकि, उनके जाने से पहले AIADMK और कांग्रेस के सदस्यों ने भी व्यवधान डाला था। उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न मामले सहित विभिन्न मुद्दों पर नारे लगाए और तख्तियां दिखाईं। नतीजतन, AIADMK सदस्यों को विधानसभा को बाहर निकाल दिया गया, जबकि कांग्रेस के सदस्य बाहर चले गए।

Tamil Nadu: विधानसभा प्रोटोकॉल पर सवाल
रवि के बाहर निकलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने तमिल में पारंपरिक भाषण पढ़ा। एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने डीएमके शासन के लिए इसे आत्म-प्रचार बताते हुए इसकी आलोचना की। भाजपा के के. अन्नामलाई ने कहा कि 1991 से जे. जयललिता के सीएम के कार्यकाल के दौरान से विधानसभा में राज्य और राष्ट्रगान दोनों बजाए जाते रहे हैं, जिससे पता चलता है कि राष्ट्रगान बजाना कोई अभूतपूर्व बात नहीं है।
सदन के नेता दुरईमुरुगन ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें कहा गया कि सदन के रिकॉर्ड में केवल सरकार द्वारा तैयार किए गए पाठ को ही शामिल किया जाना चाहिए। यह लोकतांत्रिक गरिमा और परंपरा को बनाए रखने पर जोर देता है।
Tamil Nadu: राज्य-राज्यपाल संबंधों पर प्रभाव
बाद में राजभवन ने एक ट्वीट कर आरोप लगाया कि तमिलनाडु विधानसभा में एक बार फिर से संविधान और राष्ट्रगान का अपमान किया गया है। राज्यपाल ने सदन को उसके संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई और मुख्यमंत्री जो कि सदन के नेता भी हैं और विधानसभा अध्यक्ष से राष्ट्रगान गाने की जोरदार अपील की।
इसमें कहा गया, 'हालांकि, उन्होंने इस अपील को अभद्रता से इनकार कर दिया। यह गंभीर चिंता का विषय है। संविधान और राष्ट्रगान के इस तरह के अपमानजनक कृत्य में शामिल न होकर राज्यपाल गहरी पीड़ा में सदन से बाहर चले गए।'












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