तमिलनाडु चुनाव: क्या एक बयान डीएमके के लिए चुनाव का रुख़ बदल सकता है?
तमिलनाडु विधानसभा के चुनावों में डीएमके के अभियान को मतदान से सिर्फ़ चंद दिनों पहले एक झटका लगा है. यह झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने मुख्यमंत्री पलानीस्वामी को 'प्री-मेच्योर बर्थ' यानी 'अपरिपक्व पैदाइश' कह दिया.
अपनी जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि ''लोग महिलाओं की तौहीन क़त्तई बर्दाश्त नहीं करेंगे. आज कांग्रेस और डीएमके ने मुख्यमंत्री की मां का अपमान किया है, अगर ये सोग सत्ता में आ गए तो ये लोग तमिलनाडु की बाक़ी महिलाओं का भी अपमान करेंगे.''
ख़ुद मुख्यमंत्री पलानीस्वामी इस पर एक जनसभा के दौरान बात करते हुए भावुक भी हो गए थे.
उन्होंने कहा, ''मैं न केवल अपने बारे में बात कर रहा हूं, बल्कि आपकी माताओं और महिलाओं को क्या सुरक्षा है अगर यह मुख्यमंत्री की मां को ये सहना पड़े? आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर वे सत्ता में आए तो क्या होगा. मैं इस मुद्दे को नहीं उठाना चाहता था लेकिन मैं यहां की महिलाओं को देखकर ख़ुद को रोक नहीं पाया. ''
ये कहकर वे भावुक हो गए.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा के इस बयान पर डीएमके पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन और कनिमोझी ने भी आपत्ति दर्ज की जिसके बाद उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी. स्टालिन ने सभी पार्टी के लोगों को इस तरह की टिप्पणी नहीं करने की चेतावनी दी है.
ए राजा ने कहा क्या था?
तमिलनाडु की राजनीति में इस तरह के बयान नए नहीं हैं. छह अप्रैल को राज्य में मतदान होने हैं और देखना होगा कि क्या डीएमके कांग्रेस का गठबंधन राज्य में एआईएडीएमके और बीजेपी के गठबंधन के विजयरथ को इस बार रोक सकेगा.
डीएमके पार्टी के भीतर भी लोग इस बात से हैरान हैं कि ए राजा जैसे समझदार नेता कैसे इस तरह की टिप्पणी कर सकते हैं.
तमिलनाडु की राजनीति को समझने वाली और जयललिता पर 'अम्मा' किताब लिखने वाली वासंती कहती हैं, ''तमिलनाडु में एक कहावत है कि कभी-कभी ज़ुबान पर शैतान आ जाता है. लगता है ये ए. राजा के लिए वैसा ही पल था.''
दरअसल, चेन्नई में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए, ए. राजा ने राजनीति में अपने पार्टी प्रमुख स्टालिन और मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के विकास की तुलना की. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान स्टालिन जेल गए थे, पार्टी के ज़िला सचिव के रूप में कार्य किया, चेन्नई के मेयर, विधायक, मंत्री, उप-मुख्यमंत्री बने और अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.''
''जैसा कि गांवों में कहते हैं- स्टालिन एक स्वस्थ्य बच्चे जैसे हैं. वहीं पलानीसामी राजनीति के 'नाजायज़ रिश्तों से पैदा हुए अपरिपक्व पैदाइश' हैं.''
इस बयान को लेकर सफ़ाई पेश करते हुए राजा ने कहा कि 'नाजायज़ रिश्तों' से मेरा मतलब था कि कैसे जयलतिता की मौत के बाद बीजेपी की मदद से एआईएडीएमके ने सरकार चलाई है.
शुरू में सोशल मीडिया पर उनके बयान के वायरल होने के बाद भी ए. राजा ने माफ़ी माँगने से इंकार कर दिया. लेकिन एआईएडीएमके के प्रदर्शन और अपनी पार्टी की ओर से बढ़ते दबाव के बीच पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए. राजा को माफ़ी माँगनी पड़ी.
वासंती कहती हैं, ''तमिलनाडु की संस्कृति में मां को महान माना जाता है.''
तमिलनाडु की राजनीति में द्विअर्थी शब्दों का चलन
डीएमके के पुराने दिनों की बात करें, लगभग 54 साल पहले की तो बड़े नेता रैलियों को संबोधित करने के लिए आधी रात को पहुँचा करते थे. ऐसे नेता जिन्हें जनता सुनने के लिए देर रात तक या आख़िर तक रुकी रहे ऐसे नेताओं को 'प्लेटफॉर्म स्पीकर' कहा जाता था.'
कई बार ऐसे प्लेटफॉर्म स्पीकर अपने भाषणों को भड़कता हुआ बनाने के लिए द्विअर्थी शब्दों-मुहावरों का इस्तेमाल करते रहे हैं.
राजनीतिक टिप्पणीकार डी सुरेश कुमार कहते हैं, ''एम करूणानिधि का उदाहरण पेश करते हैं. जब जयलतिता सत्ता में आई तो साल 2001 में जून महीने में देर रात करूणानिधि को उनके आवास से गिरफ़्तार किया गया था.''
''इस वाक़्या का ज़िक्र करते हुए करूणानिधि रो पड़े थे, जब उन्होंने लोगों को ये बताया कि कैसे उन्हें महिला और पुरूष पुलिसकर्मियों के सामने ही अंडरवियर पहनने को कहा गया. जिस वक़्त उन्हें गिरफ़्तार किया गया था वह घर में लुंगी पहने हुए थे.''
कुमार कहते हैं, ''राधा रवि जो इस वक़्त बीजेपी के स्टार प्रचारकों में से एक हैं उन्होंने करुणानिधि के इस बयान पर कहा था कि 78 साल का शख़्स आधी रात में बिना अंडरवियर पहने क्या कर रहा था? इस तरह के अटपटे बयान सभी पार्टियों के नेताओं की ओर से आते हैं.''
''यहां तक कि महिलाएं भी इस तरह के दोहरे अर्थ वाली बातें कहती हैं. कभी-कभी, वे नीचा दिखाने वाले और अपमानजनक बयान दे देती हैं और पार्टियां भी ऐसे भाषणों को प्रोत्साहित करती हैं.''
ताज़ा उदाहरण भाजपा की राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष और कोयंबटूर दक्षिण में उम्मीदवार वनाथी श्रीनिवासन का है, जहां उनका सामना दिग्गज अभिनेता और नेता कमल हासन से है.
चुनाव अभियान के दौरान, कमल हासन के कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया था कि अभिनेता-नेता प्रधानमंत्री के अलावा किसी भी छोटे समय के राजनेता'' के साथ सीधी बहस नहीं करेंगे.
कुमार बताते हैं, ''अपनी रैली में श्रीनीवासन ने कहा कि कमल हासन अपनी लिप सर्विसिंग (मुंह चलाने) के लिए जाने जाते हैं. इसके दो मतलब होते हैं एक तो वे बोलते बहुत हैं और दूसरा जो वो अपनी फ़िल्मों में करते हैं. यहां फ़िल्मों के ज़रिए उन्होंने बतौर अभिनेता कमल हसन द्वारा किए गए किसिंग सीन पर तंज़ कसा. ''
जब जयललिता ने मिड-डे मील कार्यक्रम में अंडे की आपूर्ति बंद कर दी थी, तो करुणानिधि ने कहा था, "उन्होंने अंडों का उत्पादन बंद कर दिया है. इसके बाद कहा कि मैं योजना का ज़िक्र कर रहा था.''
'ज़मीनी मुद्दे इससे अलग हैं'
सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य और डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी यू वासुकी कहती हैं, ''व्यवहारिकता में माँ के प्रति श्रद्धा नज़र नहीं आती. महिलाएं जो महिलाओं के ख़िलाफ़ ही ग़लत बोलती हैं यह सिर्फ़ चुनाव तक सीमित नहीं रहता. मैं इस वक़्त कोविलपट्टी में चुनावी यात्रा पर हूं. यहां 40,000 लोग जो माचिस की तीलियां बनाने का काम करते थे इस वक़्त बेरोज़गार हैं क्योंकि इन कारख़ानों के मालिक कारख़ाने चलाने में असमर्थ हैं. यहां बेरोज़गारी और पीने के लिए साफ़ पानी सबसे बड़ा मुद्दा है.''
बीजेपी की थाउज़ेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार ख़ुशबू सुंदर कहती हैं, ''सबसे बड़ी वजह है डर कि एआईएडीएमके सत्ता में तीसरी बार वापस आ जाएगी. इसलिए, वे पुरुषों को गाली देने की ऐसी नीच हरकतें कर रहे हैं लेकिन ये नहीं समझ पा रहे कि यह गालियां वो महिलाओं को दे रहे हैं.''
ख़ुशबू के लिए पूर्व में भाजपा के नेता एच. राजा ने अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया था उस वक़्त वह कांग्रेस की प्रवक्ता थीं.
वह कहती हैं, "चूंकि मैं अब भाजपा में हूं, इसलिए मुझे डीएमके और कांग्रेस के लोगों ने गाली दी और ट्रोल किया. उनके पास यही एकमात्र तरीक़ा है जिससे वह दिखा सकते हैं कि वे महिलाओं से बेहतर हैं.''
इस बार चुनाव के स्पॉटलाइट में महिलाएं
ए. राजा की टिप्पणी और उनकी टिप्पणियों के आसपास का विवाद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस चुनाव में फ़ोकस महिलाओं और उनके लिए किए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं के ऐलान पर रहा है.
जैसे ही चुनावी गतिविधियां तेज़ हुईं तो कमल हसन ने पहली बार घोषणा की थी कि उनकी पार्टी गृहिणियों को 1,000 रुपये देगी.
डीएमके और एआईएडीएमके ने महिलाओं को आकर्षित करने के लिए सरकारी सेवा में महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश के विस्तार, एक साल तक मुफ़्त वाशिंग मशीन, 50 प्रतिशत कम या मुफ़्त बस पास, मुफ़्त केबल कनेक्शन आदि विभिन्न सुविधाएं देने का ऐलान किया.
इन सभी लोकलुभावन कार्यक्रमों के बाद और करुणानिधि और जयललिता जैसे राजनीतिक प्रतीकों की अनुपस्थिति में, राजा की टिप्पणी के क्या मायने होंगे ये आने वाला वक़्त बेहतर बताएगा.
राजनीतिक असर क्या होगा?
बीबीसी ने डीएमके और एआईएडीएमके के नेताओं से संपर्क किया. वे या तो प्रचार में व्यस्त थे, उपलब्ध नहीं थे या उन्होंने इसपर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
वासुकी कहती हैं, ''मुझे नहीं लगता कि यह बयान इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा. उनकी (ए. राजा) बात ग़लत थी और उन्होंने माफ़ी माँगी है. यह मूल रूप से हमारे समाज की पितृसत्तात्मक संस्कृति को दर्शाता है.''
वहीं बीजेपी नेता ख़ुशबू जिनकी कैंपेन की तस्वीरें जयललिता के साथ हैं ना कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ, उनका मानना है कि ''इस बयान का नुक़सान डीएमके को होगा. तमिलनाडु में माँ को लेकर लोग बहुत संवेदनशील हैं. सीएम की माँ को गाली देकर, वे पूर्व सीएम को गाली दे रहे हैं जो अम्मा के रूप में लोकप्रिय थीं.''
राजनीतिक टिप्पणीकार अज़ी सेंथिलनाथन कहते हैं, ''राजा की टिप्पणी बुरी ज़रूर है, लेकिन, ये सभी क्षणिक मुद्दे हैं जो मतदाताओं की प्रमुख चिंता में शामिल नहीं होंगे. मतदाता एक नेता के अविश्वास और टिप्पणी के बजाय अन्य बुनियादी मुद्दों को देखेंगे.''
''यह केवल प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने इसे उठाया है, लेकिन पश्चिमी तमिलनाडु के अलावा, किसी इलाक़े में इस बयान से कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है."
पश्चिमी तमिलनाडु में आठ ज़िले शामिल हैं. यह वह क्षेत्र है जहाँ गौंडर प्रमुख समुदाय है, और इस जाति समूह से मुख्यमंत्री पलानीस्वामी आते हैं.
वासंती इस दृष्टिकोण से सहमत हैं कि राजा का बयान पश्चिमी तमिलनाडु को प्रभावित करेगा, जिसमें 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्र हैं. "गौंडर समुदाय पलानीस्वामी के लिए अब पूरी तरह से आगे आएगा.''
वासंती कहती हैं, "लोगों की याददाश्त छोटी होती है लेकिन मतदान के लिए सिर्फ़ कुछ दिनों पहले यह बयान हानिकारक साबित होगा इसमें कोई संदेह नहीं है. यह बड़ी बेवक़ूफ़ी थी."
वहीं कुमार कहते हैं कि ग्रामीण इलाक़ो में इस बयान का असर दिखेगा.
तमिलनाडु में राजनीतिक भाषणों में दोहरे अर्थों वाले शब्दों-मुहावरों के प्रयोग के बावजूद, राजा की टिप्पणी की तुलना 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी के बारे में मणिशंकर अय्यर की चायवाला 'टिप्पणी से की जा रही है.
हालांकि क्या राजा के बयान का वैसा असर होगा? इसका पता दो मई को ही चलेगा.
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