चीन के साथ सीमा मुद्दों का अब तक नहीं हुआ समाधान, सैन्य टकराव पर क्या बोले राजनाथ सिंह
चीन ने एक बार फिर से अरुणाचल प्रदेश पर दावा जताने की कोशिश की है। चीन ने भारत के पूर्वोत्तर राज्य में 30 जगहों के नाम बदल दिए हैं। चीन की इस हिमाकत पर मचे घमासान के बाद राजनाथ सिंह ने टिप्पणी की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सीमा पर भारतीय सेना पूरी मुस्तैदी से तैनात है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ कई मुद्दों पर बातचीत भी जारी है। प्रयास किया जा रहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से बाकी मुद्दों का हल निकले।

देश के शीर्ष कमांडर्स के बाइएनुअल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य वापसी और तनाव कम करना ही आगे का रास्ता है। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमापार से होने वाली आतंकी घटनाओं को रोकने में भारतीय सेना को बड़ी सफलता मिली है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय पुलिस मिलकर आतंकवाद से निपट रही है, वह सराहनीय है। हालांकि अब भी सरहद के उस पार छद्म युद्ध जारी है। होली के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सैनिकों से मिलने लेह और लद्दाख पहुंचे थे।
गौरतलब है कि भारत और चीन की सेना के बीच पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों को लेकर लगभग चार वर्षों से गतिरोध बना हुआ है। हालांकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है।
इससे पहले 19 फरवरी को दोनों देशों के बीच 21वें चरण की सैन्य वार्ता हुई थी। दोनों ही देश एलएसी को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत जारी रखने पर सहमत हैं। हालांकि पिछली बार की तरह इस बैठक में भी कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया।
गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स (PP-15) पर दोनों देशों के बीच अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों ही तरफ से सैनिक तैनात हैं। इसके अलावा आधुनिक और अडवांस हथियारों की तैनाती की गई है। देपसांग और डेमचोक को लेकर अब भी बातचीत चल रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि बीआरओ के प्रयासों से पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सड़क संचार में एक बड़ा सुधार आया है। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा को इस ऊंचाई पर ले जाने के लिए सेना के नेतृत्व की सराहना की जानी चाहिए।












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