कुछ को छोड़ दें तो सभी मुगल अय्याश थे, मुस्‍लमान न मानें आदर्श- शिया वक्फ बोर्ड

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नई दिल्‍ली। मोहब्‍बत की निशानी ताजमहल इन दिनों राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। इस बीच शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन का बयान आया है। वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन रिजवी ने कहा कि एक दो मुगलों को छोड़कर सभी अय्याश थे, उन्‍हें मुसलमान अपना आदर्श ना मानें। न्‍यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए रिजवी ने कहा कि ताजमहल प्‍यार का प्रतीक हो सकता है, लेकिन पूजा का नहीं। रिजवी से जब यूपी सरकार द्वारा अयोध्‍या में भगवान राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाने के प्रस्‍ताव की हो रही आलोचना के बारे में पूछा गया कि तो उन्‍होंने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि यह मुद्दा ही क्‍यों है।

कुछ को छोड़ दें तो सभी मुगल अय्याश थे, मुस्‍लमान न मानें आदर्श- शिया वक्फ बोर्ड

जब मायावती ने अपनी खुद की प्रतिमा बनवाई तो किसी ने विरोध नहीं किया। तो फिर राम की प्रतिमा बनाने के प्रस्ताव पर विरोध क्यों हो रहा है?' उन्होंने कहा कि राम की प्रतिमा का निर्माण एक अच्छा कदम होगा क्योंकि अयोध्या हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। उन्‍होंने कहा कि राम की मूर्ति का विरोध होना बहुत ही दुखद है। यह एक बहुत अच्छा कदम है, अयोध्या हिंदू विरासत का केंद्र है।

संगीत सोम ने बताया ताजमहल को भारतीय संस्‍कृति पर धब्‍बा

मेरठ की सरधना सीट से भाजपा विधायक संगीत सोम ने कहा कि कुछ लोगों को बहुत दर्द हुआ जब ताजमहल का नाम देश के ऐतिहासिक स्थलों में से निकाल दिया गया। सोम ने कहा कि ये कैसा इतिहास, किस काम का इतिहास जिस में अपने पिता को ही कैद कर डाला था। इन लोगों ने हिंदुस्तान में हिन्दुओं का सर्वनाश किया था।

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English summary
The chairman of the Uttar Pradesh Shia Waqf Board on Tuesday jumped into the controversy surrounding the Taj Mahal, saying that the monument cannot be a symbol of "worship." He also alleged that "most Mughals were 'aiyaash'" or 'dissolute.'
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