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UN में चीन और पाकिस्‍तान की हर चाल को मात देने वाले सैयद अकबरुद्दीन रिटायर, ट्वीट की पत्‍नी पदमा के साथ खास फोटो

नई दिल्‍ली। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में भारत के राजदूत रहे सैयद अकबरुद्दीन अब रिटायर हो गए हैं। अकबरुद्दीन को एक ऐसे राजदूत के तौर पर याद रखा जाएगा जिन्‍होंने साल 2019 में आतंकवाद से जुड़े हर मसले पर भारत का रूख आक्रामक और स्‍पष्‍ट तरीके से पेश किया। अब वह यूएन में भारत का प्रतिनिधित्‍व नहीं करेंगे और विदेश नीतियों से जुड़े विषयों में रूचि रखने वाले लोग निश्चित तौर पर उन्‍हें मिस करने वाले हैं। अकबरुद्दीन ने रिटायरमेंट के बाद अपनी पत्नी के साथ एक फोटोग्राफ ट्वीट की है और इस फोटो को कई बार रि-ट्वीट किया जा चुका है और इस पर कई कमेंट भी आ रहे हैं।

अबरुद्दीन ने दिखाई डिप्‍लोमैसी से पहले की जिंदगी की झलक

अबरुद्दीन ने दिखाई डिप्‍लोमैसी से पहले की जिंदगी की झलक

अकबरुद्दीन ने एक मई की शाम यह फोटो ट्वीट की। उन्‍होंने कैप्‍शन में लिखा, 'निरंतरता और बदलाव, जिंदगी डिप्‍लोमैसी से पहले और डिप्‍लोमैसी के अलावा।' एक तस्‍पीर जो ब्‍लैक एंड व्‍हाइट है वह 19 अगस्‍त 1985 की और दूसरी तस्‍वीर एक मई 2020 की है। इस तस्‍वीर को करीब 48 हजार लोग लाइक कर चुके हैं और करीब छह हजार लोग कमेंट कर चुके हैं। अकबरुद्दीन की फैन फॉलोइंग भी बहुत है और ट्विटर पर उनके फॉलोअर्स की संख्या देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अकबरुद्दीन को ट्विटर पर करीब 29 लाख लोग फॉलो करते हैं। अकबरुद्दीन की जगह अब टीएस त्रि‍मूर्ति भारत का प्रतिनिधित्‍व करते नजर आएंगे।

चीन और पाकिस्‍तान को बेनकाब करने वाले अकबरुद्दीन

14 फरवरी 2019 को जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिेले को निशाना बनाया था। उस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद जैश के सरगना मसूद अजहर को यूएन की सिक्‍योरिटी काउंसिल में आतंकी घोषित करने की मांग तेज हो गई। मगर चीन हर बार अड़ंगा डाल देता। चीन के हर प्रयास को अपने तर्को से विफल करने वाले कोई और नहीं बल्कि अकबरुद्दीन ही थे। मई 2019 में आखिरकारी मसूद अजहर को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किया जा सका। इसके अलावा अगस्‍त में जब जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया तो उसके बाद चीन की तरफ बुलाई गई एक मीटिंग में अकबरुद्दीन ने फिर चीन को अपने तर्कों से पस्‍त किया। करीब डेढ़ साल में अकबरुद्दीन की लोकप्रियता ने एक नया मुकाम छुआ था।

साल 2016 में यूएन में बने राजदूत

साल 2016 में यूएन में बने राजदूत

सैयद अकबरुद्दीन जनवरी 2016 में यूएन में भारत के स्‍थायी राजदूत नियुक्‍त हुए थे। वह इंडियन फॉरेन सर्विस (आईएफएस) के साल 1985 के बैच के ऑफिसर हैं। जो फोटो उन्‍होंने ब्‍लैक एंड व्‍हाइट में शेयर की है, वह तब की है जब वह अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे थे। यूएन में पोस्टिंग से पहले वह विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता के तौर पर अपनी जिम्‍मेदारी निभा रहे थे। प्रवक्‍ता से पहले अकबरुद्दीन साल 2004 से 2005 तक विदेश सचिव के ऑफिस में बतौर डायरेक्‍टर मंत्रालय में तैनात थे। उन्‍होंने समय-समय पर यूएन में पाकिस्‍तान के प्रपोगेंडा पर जवा‍ब दिया। वह कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर उनके प्रवक्‍ता के तौर पर नजर आए थे। जनवरी 2012 से अप्रैल 2015 तक उन्‍होंने विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता की जिम्‍मेदारी निभाई।

अरबी भाषा के जानकार अरबी भाषा के जानकार

यूएन से अलविदा लेते समय अकबरुद्दीन ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग पर नमस्‍ते के साथ यूएन चीफ एंटोनियो गुटारेशे को बाय कहा। उनका मानना है कि भारत, सिक्‍योरिटी काउंसिल का स्‍थायी सदस्‍य बनने का हकदार है। अकबरुद्दीन, पाकिस्‍तान के इस्‍लामाबाद में बतौर काउंसलर भी तैनात रहे हैं। अकबरुद्दीन को इस वजह से ही पाकिस्‍तान से जुड़े मसलों का विशेषज्ञ माना जाता है। वह कतर में भी भारत के राजदूत रहे हैं। अकबरुद्दीन ने बेगमपेट के हैदराबाद पब्लिक स्‍कूल से पढाई की है। उनके पिता उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी के जर्नलिज्‍म और कम्‍यूनिकेशन डिपार्टमेंट के हेड थे। अकबरुद्दीन की शादी पदमा से हुई है और दोनों दो बेटों के माता-पिता हैं।

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