अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को मिलेगी शांति, बोले उनके परिजन
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के परिजन और रिश्तेदारों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। बता दें कि साल 1951 में आरएसएस की राजनीतिक शाखा भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संविधान के अनुच्छेद 370 के घोर विरोधी थे।

उनके भतीजे जस्टिस (रिटायर्ड) चित्तातोष मुखर्जी ने खुले रूप में सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि आज हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है, यह मेरे चाचा की इच्छा पूर्ति है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी मृत्यू अभी भी हमारे लिए एक रहस्य बनी हुई है क्योंकि तब जवाहरलाल नेहरू ने उनकी मौत की किसी भी जांच से इनकार कर दिया था। दरअसल रिटायर्ड जस्टिस उस समय का जिक्र कर रहे थे जब 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की गिरफ्तारी के बाद श्रीनगर जेल में जनसंघ के संस्थापक की मृत्यू हो गई थी।
वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दूसरे भतीजे जनतोश मुखर्जी ने भी उनकी अपने चाचा की मृत्यू पर कहा कि हम मानते हैं कि यह एक स्वाभाविक मौत नहीं थी। शेख अब्दुल्ला और नेहरू ने उनके खिलाफ साजिश रची। हम दृढ़ता से यह मानते हैं कि उनको मारा गया था। इसके अलावा उन्होंने केंद्र को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं कश्मीर में यह साहसिक कदम उठाने के लिए अमित शाह और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देना चाहूंगा। मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें एक पत्र लिखूंगा।
बता दें कि मोदी सरकार में गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा और फिर लोकसभा में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया। सरकार ने अपने प्रस्ताव में कहा कि लद्दाख अलद केंद्र शासित राज्य बनेगा जबकि जम्मू-कश्मीर भी केंद्र शासित बनेगा लेकिन यहां विधानसभा रहेगी। मतलब जिस तरह से दिल्ली में सरकार का गठन होता है ठीक वैसे ही कश्मीर में भी मुख्यमंत्री रहेगा लेकिन पॉवर वहां के उपराज्यपाल के पास ज्यादा होगा। मतलब राज्य में केंद्र का हस्तक्षेप पहले से काफी ज्यादा हो जाएगा।
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