Suvendu Adhikari की जाति क्‍या हैं? पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को हराया, CM की रेस में हैं सबसे आगे

Suvendu Adhikari Caste: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनान परिणाम 4 मई 2026 को घोषित हो चुका है। भाजपा ने 207 सीटों पर प्रंचड जीत हासिल कर तृण मूल कांग्रेस का सफाया कर दिया है। इतना ही नहीं ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से हार गई हैं। ये वो ही सुवेंदु अधिकारी हैं जो कभी ममता दीदी के राइट हैंड माने जाते थे। ममता दीदी के गढ़ में ही उन्‍हीं को पटकनी देने वाले सुवेंद अधिकारी का नाम अब बंगाल का मुख्‍यमंत्री बनने की रेस में सबसे आ‍गे चल रहा है।

याद रहे चुनाव प्रचार के दौरान ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि बंगाल की जनता ने 'दीदी का सूपड़ा साफ' कर दिया है और भाजपा को स्‍पष्‍ठ बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इसके साथ ही अमित शाह ने बंगाल में 152 में से 110 सीटें जीतने का दावा किया और कहा कि भाजपा की सरकार प्रचंड बहुमत से बनेगी। उन्होंने कहा, "दीदी जाने वाली हैं, बीजेपी आने वाली है। अमित शाह ने साफ कहा, "बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बंगाली होगा, बंगाल की धरती पर जन्मा होगा, बंगाली बोलेगा। बस फर्क इतना होगा कि वह टीएमसी का नहीं, बीजेपी का कार्यकर्ता होगा।"

Suvendu Adhikari Caste

हालांकि अमित शाह ने सीधे सुवेंदु अधिकारी का नाम तब नहीं लिया था लेकिन बंगाल में भाजपा की शानदार जीत का श्रेय सुवेंद्र अधिकारी की पिछले कुछ साल की कड़ी मेहनत को जाता है, इसलिए मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल उम्‍मीदवार बन गए हैं। आइए जानते हैं सुवेंदु अधिकारी की जाति क्‍या है, इनका अब तक का राजनीतिक सफर कैसा रहा?

Who is Suvendu Adhikari? कौन हैं सुवेंदु अधिकारी

सुवेंदु पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता का अहम पद संभाल रहे हैं। भाजपा में आने से पहले, वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे और उन्होंने राज्य की राजनीति में एक लंबा सफर तय किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर (Bhabanipur) विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। इसके अलावा नंदीग्राम विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़े।

Suvendu Adhikari का परिवार

सुवेंदु अधिकारी का जन्म पश्चिम बंगाल के पूर्ब मेदिनीपुर जिले के कोंटाई में 15 दिसंबर 1970 को एक राजनीतिक घराने में हुआ था। उनके पिता, अनुभवी राजनेता शिशिर अधिकारी, केंद्रीय मंत्री के तौर पर सेवा दे चुके हैं, जबकि उनकी माता का नाम गायत्री अधिकारी है। उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी दोनों ही राजनीति में सक्रिय हैं। यह परिवार पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी गहरी पैठ रखता है। म‍ीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुवेंद्र अधिकारी अविवाहित हैं।

Suvendu Adhikari की जाति क्‍या है?

सुवेंदु अधिकारी हिंदू धर्म का पालन करते हैं और चुनावी हलफनामे के अनुसार सुवेंदु सामान्‍य कैटेगरी में आते हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर (Purba Medinipur) जिले के प्रमुख 'अधिकारी' परिवार से आने वाले सुवेंदु प्रभावशाली महिष्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रमुख 'खेतिहर' और 'भूमि-अधिकारी' समुदाय के नेता के रूप में इनकी पहचान है। उनके पिता सिसिर अधिकारी भी इसी क्षेत्र से एक वरिष्ठ नेता रहे हैं।

Suvendu Adhikari क्‍या "ब्राह्मण" हैं?

हालांकि सुवेंदु अधिकारी ने 2020 में एक कार्यक्रम में अपनी पहचान "ब्राह्मण" परिवार के रूप में भी बताई थी, एक समय शुभेंदु अधिकारी स्वयं तृणमूल के प्रतिनिधि के रूप में सनातन ब्राह्मण ट्रस्ट का कामकाज संभालते थे। टीएमसी छोड़ने के बाद सुवेंदु ने जब भाजपा ज्‍वाइन की थी तब राज्य के सनातन ब्राह्मण ट्रस्ट से उन्‍हें हटा दिया गया था। लेकिन क्षेत्रीय और सामाजिक रूप से उनका परिवार पूर्वी मेदिनीपुर के प्रभावशाली महिष्य वर्ग का हिस्सा माना जाता है।

Suvendu Adhikari Eduaction: कितने पढ़े-लिखें हैं सुवेंदु अधिकारी?

सुवेंदु अधिकारी ने न्यू बैरकपुर स्थित आचार्य प्रफुल्ल चंद्र कॉलेज से अपनी बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए.) की डिग्री प्राप्त की थी। इसके उपरांत, उन्होंने कोलकाता के प्रतिष्ठित रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स (एम.ए.) की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की।

Suvendu Adhikari political career: सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक करियर

🟠सुवेंदु अधिकारी अप्रैल 2026 में भवानीपुर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। वर्तमान में, वे भाजपा के वरिष्ठ नेता, नंदीग्राम के विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। 2024 में, उन्होंने भाजपा टिकट पर कांथी सीट से चुनाव लड़ा पर लेकिन चुनाव हार गए।

🟠वर्ष 2021 में, अधिकारी ने अपने गढ़ नंदीग्राम से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया। इस निर्णायक जीत के बाद वे पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने। इससे कुछ माह पूर्व, 2020 में, उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ विद्रोह कर तृणमूल कांग्रेस छोड़ी और भाजपा में शामिल हुए।

🟠सुवेंदु अधिकारी ने अपनी राजनीतिक यात्रा छात्र राजनीति से शुरू की, जब वे कोंटाई प्रत्तापनारायण विद्यामंदिर में अध्ययनरत थे। उन्होंने मिदनापुर में युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई।

🟠1998 में ममता बनर्जी के साथ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक बने, जिससे उनके राजनीतिक करियर को एक नई दिशा मिली।

🟠अधिकारी ने 2006 से 2009 तक कंठी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से विधायक (एमएलए) के रूप में कार्य किया। इसके बाद, उन्होंने 2009 से 2021 तक नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

🟠2014 से 2016 तक, वे तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य (एमपी) भी रहे। टीएमसी में रहते हुए, उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री और जल संसाधन अन्वेषण एवं विकास मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले, जिससे उनकी प्रशासनिक क्षमता उजागर हुई।

🟠19 दिसंबर 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बजर्नी को झटका देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा की।

सुवेंदु अधिकारी से जुड़े विवाद

हालांकि, सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर कुछ विवादों से अछूता नहीं रहा। उनका नाम सारदा घोटाला और नारदा स्टिंग ऑपरेशन जैसे मामलों में भी सामने आया है, जिन्होंने राज्य की राजनीति में काफी हलचल मचाई थी। इन विवादों के बावजूद, उन्होंने अपनी राजनीतिक उपस्थिति और प्रभाव को बनाए रखा है।

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