संकट में सुषमा स्वराज का साथ देते उनके ‘विरोधी’
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) सुषमा स्वराज ने भाजपा के अंदर रहते हुए लंबे समय तक नरेन्द्र मोदी का विरोध किया। वह नहीं चाहती थीं कि मोदी लोकसभा चुनाव में पार्टी की कैंपेन कमेटी के प्रभारी बने मोदी। वह इस लिहाज से लाल कृष्ण आडवाणी के साथ खड़ी थीं।
सुषमा के साथ पार्टी
पर अब जब उनके ऊपर संकट आया बदनाम ललित मोदी का साथ देने के सवाल पर तो पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर पार्टी के मुखिया अमित शाह उनका साथ दे रहे हैं। हालांकि विपक्ष उनके इस्तीफे की जोरदार तरीके से मांग कर रहा है। [कौन हैं विवादों में फंसे सुषमा स्वराज के पति, जानिए 10 बातें]
जननेता नहीं
स्वराज को लंबे समय से फोलो करने वालों को मालूम है कि वह आमतौर पर विवादों से दूर रही हैं। वह जननेता तो नहीं है। भाजपा की सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से चुनाव लड़कर लोकसभा में पहुंच रही हैं वह। [10 बड़ी वजह क्यों सुषमा स्वराज बुरी तरह से फंसी]
करती रही विरोध
बीते लोकसभा चुनाव से पहले वह नरेन्द्र मोदी के पार्टी में विरोधी खेमे की एक्टिव सदस्य थी। जैसा कि ऊपर जिक्र किया गया कि मोदी को पार्टी की कैंपेन कमेटी का प्रमुख बनाए जाने से लेकर प्रधानमंत्री बनाए जाने से पहले तक वह उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विरोध कर रही थीं।
पर जब भाजपा को लोकसभा चुनाव में शानदार सफलता मिलीं तो उन्होंने भी मोदजी को अपना नेता मान लिया। यानी कि जब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा तो वह मोदी को नेता मानने लगीं। भाजपा को लंबे समय से कवर कर रहे पत्रकार पी. सौरभ कहते हैं कि सुषमा स्वराज महत्वाकांक्षी किस्म की नेता हैं। वह हरियाणा से आती हैं।
पर अब वह हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी नहीं जीत सकती। वह दिल्ली की भी मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। कहने वाले कह रहे हैं कि उनके संकट के समय पार्टी के उन नेताओं ने भी उनका जिस तरह से साथ दिया है,जिन्हें वह अपना विरोधी मानती रही है, उसे उन्हें याद रखना चाहिए।













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