Solar Eclipse 2021: लद्दाख -अरुणाचल को छोड़ पूरे भारत में कहीं नहीं दिखेगा 'सूर्य ग्रहण'
नई दिल्ली, 10 जून। साल 2021 का पहला 'सूर्य ग्रहण' आज है। आज 'शनि जयंती' और 'वट सावित्री' अमावस्या होने के कारण इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है। वैसे तो ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और ना ही प्रभावी है लेकिन अरुणाचल और लद्दाख में ये आशिंक तौर पर दिखाई देगा, वो भी तब जब ग्रहण खत्म होने की कगार पर होगा।

साल का पहला सूर्यग्रहण आज 1.42 पर
बता दें कि सूर्य ग्रहण आज दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 6 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। ग्रहण काल की कुल अवधि 4 घंटे 59 मिनट रहेगी। वैसे ये सूर्यग्रहण नार्थ अमेरिका , यूरोप, एशिया, आर्कटिक, अटलांटिक में आंशिक रूप से जबकि उत्तरी कनाड़ा, ग्रीनलैंड और रूस में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।
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अरुणाचल प्रदेश में दिखेगा ग्रहण
अरुणाचल प्रदेश में, लोग सूर्यास्त से ठीक पहले शाम लगभग 5:52 बजे सूर्य ग्रहण का एक छोटा अंश देख सकते हैं, जिसकी अवधि मुश्किल से 3 से 4 मिनट तक रहेगी। कोलकाता के एमपी बिड़ला तारामंडल के निदेशक देबिप्रसाद दुआरी ने कहा कि 'अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में देश के उत्तर-पूर्वी छोर को छोड़कर, ग्रहण का मार्ग भारत के लगभग किसी भी हिस्से को नहीं छूएगा।'

इस साल 4 ग्रहण
इस साल कुल मिलाकर 4 ग्रहण लगने वाले हैं। (दो सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण) , पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को लग चुका है तो वहीं दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लगेगा। जबकि पहला सूर्य ग्रहण आज लग रहा है तो दूसरा सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर को लगेगा।
नग्न आंखों से ना देखें सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए क्योंकि ग्रहण के वक्त बहुत सारी ऐसी ऊर्जाएं और तरंगे निकलती हैं, जो कि इंसान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ग्रहण प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है, यह घटना हमेशा अमावस्या को होती है।

खास बातें
आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना है जो हर साल कई बार होती है। एस्ट्रोनॉमी एंड इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के अनुसार, सौर मंडल में आठ मुख्य ग्रह हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ये आठ मुख्य ग्रह मंगल, पृथ्वी, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, यूरेनस और नेपच्यून हैं। हर ग्रह के उपग्रह होते हैं। चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है जो पृथ्वी की परिक्रमा करता रहता है। परिक्रमा की प्रक्रिया के दौरान जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है, तब यह पृथ्वी पर आने वाले सूर्य के प्रकाश को रोकता है और सूर्य में अपनी छवि बनाता है। इस खगोलीय घटना को 'सूर्य ग्रहण' कहा जाता है।












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