15 मिनट में ही तबाह कर दिए थे कमांडोज ने आतंकी कैंप्स
नई दिल्ली। इंडियन आर्मी की सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी खबरें 15 दिन बाद तक तक आ रही हैं। इस सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ीं कुछ और नई जानकारियांं सामने आई हैं। इन जानकारियों के मुताबिक कमांडोज ने एलओसी पार करते ही आतंकी कैंप्स पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। कमांडोज का प्लान एलओसी पार करके टारगेट्स को पूरी तरह से खत्म कर देना था।

पांच किलोमीटर के दायरे में टारगेट्स
एक अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक किसी भी कमांडो का इरादा आतंकी को एनकाउंटर जैसी गतिविधि में व्यस्त करने का नहीं था।
सभी टारगेट्स पांच किलोमीटर के दायरे में थे और ऐसे में यह कोई आसान काम नहीं था। स्पेशल फोर्सेज के कमांडोज को थर्मल इमेजर्स को भी चकमा देना था और एंटी-पर्सनल माइंस से भी खुद को बचाना था। अपने मिशन को अंजाम देते समय कमांडोज ने कोई भी छोटी गलती तक नहीं की थी।
जल्द से जल्द पूरा करना था मिशन
इस पूरे ऑपरेशन को जल्द से जल्द निबटाने की ओर सबका ध्यान था। मिशन को एक तय समय में पूरा करना था और कमांडोज एक भी सेकेंड का समय बर्बाद नहीं कर सकते थे।
कमांडोज ने एलओसी को पार करने के बाद टारगेट्स पर ध्यान लगाया। कमांडोज को उनका मिशन पूरा करने में रूस में बनी एक खास तरह की बंदूक ने काफी मदद की।
इस बंदूक को फायरिंग करने में आग के गोले निकले हैं और इसने कमांडोज को आतंकी कैंप्स तबाह करने में काफी मदद की।
15 मिनट से भी कम समय और काम तमाम
कमांडोज ने सात लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया और टुकड़ों में बंटी हुई कमांडोज की टीम अपने मिशन को अंजाम देने में लगी हुई थी।
हर टीम ने 15 मिनट से भी कम का समय लगा था। कमांडोज लगातार अपने टारगेट्स को बर्बाद करने में लगे हुए थे। लीपा, केल, भीमबेर, अथमुकाम और टट्टापानी स्थित कैंपो को निशाना बनाया गया था।
सिर्फ सफल होकर ही लौटना था
अपने मिशन को अंजाम देने के बाद हर कमांडो को अपने बेस पर वापस लौटना था। उन्हें इस बारे में बता दिया गया था कि वह अपने मिशन को अंजाम दें और फौरन वापस लौटें।
कमांडोज भी किसी भी कीमत पर अपने मिशन को अंजाम देने के लिए रेडी थे। मिशन पर जाने से पहले कमांडोज को बता दिया गया था कि उन्हें किसी भी कीमत पर सफल होकर ही वापस लौटना है।












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