सूरत में फेक झोलाछाप डॉक्टर तैयार करने वाली 'फैक्ट्री' का भंडाफोड़, 13 अरेस्ट, जानें कैसे चलता था रैकेट?
Surat Fake Doctors Degree Racket Busted: गुजरात के सूरत में पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टर तैयार करने वाली 'फैक्ट्री' का पर्दाफाश किया है। यहां बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां तैयार की जाती थी। यह रैकेट नकली बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो-होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी (BEMS) डिग्रियां बेचकर झोलाछाप डॉक्टर तैयार कर रहा था।
इस मामले में 10 फर्जी डॉक्टरों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को आरोपियों के क्लीनिक से नकली प्रमाण पत्र, एलोपैथिक और होम्योपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन और सिरप की बोतलें बरामद हुई हैं।

कैसे चलता था यह रैकेट?
इस रैकेट को सूरत के रसेश गुजराती और अहमदाबाद के बीके रावत द्वारा संचालित किया जा रहा था। उन्होंने "बोर्ड ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मेडिसिन, अहमदाबाद" के नाम से एक फर्जी संस्था बनाई थी। इसके जरिए वे 70,000 रुपये में नकली BEMS डिग्रियां बेचते थे।
गुजराती ने 2002 में गोपीपुरा इलाके में एक कॉलेज शुरू किया था, लेकिन छात्रों की कमी के कारण कॉलेज बंद हो गया। इसके बाद उसने रावत के साथ मिलकर डिग्रियां बेचने का धंधा शुरू कर दिया।
डिग्री पाने की प्रक्रिया
- मात्र एक हफ्ते में नकली डिग्री: डिग्री के इच्छुक व्यक्तियों को एक सप्ताह के भीतर नकली डिग्री प्रमाण पत्र, मार्कशीट, पंजीकरण प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड मिल जाते थे।
- कोई पढ़ाई या प्रशिक्षण नहीं: इन डिग्रियों के लिए किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण या परीक्षा आवश्यक नहीं था।
- वेबसाइट के जरिए पंजीकरण: रावत ने www.behmgujrat.com नाम की एक वेबसाइट बनाई थी, जहां इन झोलाछाप डॉक्टरों का पंजीकरण होता था।
1,500 फर्जी डॉक्टर तैयार
पुलिस की जांच में पता चला है कि इस रैकेट ने अब तक लगभग 1,500 फर्जी डॉक्टर तैयार किए हैं। इनमें से कई डॉक्टर केवल 10वीं पास हैं। पुलिस को अहमदाबाद में रावत के घर ये बरामद किया...
- 10 खाली डिग्रियां
- 30 नाम वाली नकली डिग्रियां
- 160 आवेदन पत्र
- 12 आईडी कार्ड
- 1,630 फर्जी डॉक्टरों का रजिस्टर मिला है।
सालाना फीस वसूली और धमकी
रावत और गुजराती इन डॉक्टरों से हर साल पंजीकरण नवीनीकरण के नाम पर 3,000 रुपये वसूलते थे। जो लोग फीस देने से मना करते, उन्हें रावत का साथी इरफान सैय्यद धमकी देता था।
पुलिस का अगला कदम
सूरत पुलिस ने मामले में गहराई से जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि यह रैकेट गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में भी फैला हो सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, और जल्द ही अन्य दोषियों को भी पकड़ा जाएगा।
लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा
यह रैकेट न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि इससे जनता के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा है। ऐसे झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज करने में अक्षम हैं, जिससे जानलेवा गलतियां हो सकती हैं।












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