Maharashtra: क्या शरद पवार की NCP(SP) की विरासत को संभाल पाएंगी सुप्रिया सुले?
Maharashtra Politics: लोकसभा चुनावों में एनसीपी (एसपी) को 10 सीटों पर लड़कर महाराष्ट्र में 8 सीटें मिली थीं, तो शरद पवार की पार्टी सबसे शानदार स्ट्राइक रेट का डंका पीट रही थी। लेकिन,पांच महीने बाद ही विधानसभा चुनावों में पार्टी सीन से ही गायब हो चुकी है। 87 सीटों पर लड़कर भी पार्टी 10 सीटें ही जीती है और वोट शेयर भी 11% के करीब है।
पार्टी के संस्थापक शरद पवार विधानसभा चुनावों के दौरान ही सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का संकेत दे रहे थे। वैसे भी उनकी 83 साल की उम्र हो चुकी है और पांच साल बाद लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए वह शारीरिक तौर पर कितने फिट रहेंगे, यह बात वह खुद भी समझ रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि वह अपनी पार्टी की विरासत किसे सौंपना चाहेंगे जो इसे यहां से आगे लेकर जाने में सक्षम हो।

एनसीपी (एसपी) को कबतक संभाल सकेंगे शरद पवार
पवार के पास सबसे पहली चुनौती पार्टी को एकजुट रखने की है। विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद 10 विधायकों और 8 लोकसभा सांसदों को एकसाथ जोड़कर रखना आसान नहीं है। खासकर उनके उस बयान के बाद,जब चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने कहा था,'पहले घोषणा की थी कि मैं कोई भी आम चुनाव नहीं लड़ूंगा और अब मैं सोचूंगा कि राज्यसभा के मौजूदा कार्यकाल के बाद क्या मैं आगे यह जारी रखूंगा।'
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पवार का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल 2026 में खत्म हो जाएगा। अभी उनकी पार्टी जहां पर है,वहां उसे जोड़कर रखने के लिए उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बने रहने की जरूरत है। लेकिन,महाराष्ट्र की जनता ने जो जनादेश दिया है,उसके बाद चाहकर भी उनका अपने दम पर राज्यसभा में पहुंचना अब मुश्किल है।
किसे सौंपेंगे एनसीपी (एसपी) की विरासत?
मौके की नजाकत को समझते हुए पवार ने अभी यही संकेत देने की कोशिश की है कि वह फिलहाल राजनीति में सक्रिय रहेंगे। चुनाव परिणाम के बाद कराड में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, 'मैं खाली नहीं बैठूंगा और लोगों से मिलकर उनके मुद्दों का समाधान तलाशता रहूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि वह नई पीढ़ी को तैयार करना चाहते हैं, जो 'मेरी विचारधारा' में विश्वास करे।
जमीनी राजनीति में सुप्रिया सुले की है पिता के नाम से पहचान
दरअसल, पवार को मालूम है कि उनके पास विकल्प सीमित हैं। उनके अलावा पार्टी में फिलहाल किसी जनाधार वाले मजबूत नेता का अभाव है। उनकी बेटी सुप्रिया सुले भले ही 2006 से राजनीति में सक्रिय हैं और तभी से सांसद भी हैं। लेकिन, वह दिल्ली में पार्टी का चेहरा भर हैं, महाराष्ट्र की सियासी जमीन पर उनका शरद पवार की बेटी होने से ज्यादा शायद ही कोई अलग राजनीतिक पहचान है।
राजनीति में खास प्रभाव नहीं छोड़ सके पवार के दो पोते
इस बार विधानसभा चुनाव में एनसीपी प्रमुख अजित पवार के मुकाबले शरद पवार ने अपने परिवार के दो और सदस्यों को खड़ा करने की कोशिश की थी। एक पोते युगेंद्र बारामती में अजित पवार से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। दूसरे पोते रोहित पवार कर्जत-जामखेड से चुनाव जीते भी तो सिर्फ 1,243 वोटों से। वह भी तब जब अजित पावर ने उनके खिलाफ प्रचार करने से परहेज किया।
कुल मिलाकर आने वाले पांच वर्षों तक पार्टी को एकजुट रखना एनसीपी (एसपी) की सबसे बड़ी चुनौती है। विधानसभा चुनावों के बाद स्थानीय निकायों के चुनाव भी होने हैं, जहां संयुक्त एनसीपी पहले अच्छा करती रही है। लेकिन,अब हालात बदल चुके हैं।
रोडमैप के इंतजार में पार्टी
इंडियन एक्सप्रेस ने पवार के करीबी और उनकी पार्टी के महासचिव जयदेव गायकवाड़ के हवाले से बताया है कि इसे आगे बढ़ने के लिए पार्टी को एक रोडमैप चाए। हालांकि,उन्हें उम्मीद है कि पार्टी फिर से वापस लौटेगी। वे कहते हैं, 'एनसीपी (एसपी) और पवार के भविष्य के बारे में कोई भी जो कहना चाहे कह सकता है। लेकिन,उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि 'वह जो विचारधारा मानते हैं, उसके लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी।'
लेकिन,राजनीतिक विश्लेषक और शिवाजी यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विज्ञान के पूर्व प्रमुख प्रकाश पावर ने कहा,'अगले आम चुनावों तक पवार के सक्रिय रहने की संभावना नहीं है,असल में उनकी उम्र की वजह से।'
सुप्रिया सुले संभाल सकेंगी पिता की सियासी विरासत?
शरद पवार ने जब 1998 में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर एनसीपी बनाई थी, तो उसका स्वरूप पारिवारिक नहीं था। लेकिन, धीरे-धीरे यह पार्टी पूरी तरह से पवार की पारिवारिक पार्टी बन चुकी है। पिछले कुछ समय से उन्होंने केंद्र में इस पार्टी की ओर से अपनी बेटी सुप्रिया सुले को बढ़ाना शुरू किया था और राज्य में भतीजे अजित पवार को।
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लेकिन, अजित पावर 'गुरु गुड़ और चेला चीनी' बन चुके हैं। अब एनसीपी (एसपी) की स्वाभाविक जिम्मेदारी सुप्रिया सुले पर आने वाली है। लेकिन, वह अपने पिता की इस सियासी विरासत को किस हद तक संभाल सकेंगी, यह बहुत बड़ा सवाल है।
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