'बहुमत से चलेगा देश', इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज का विवादित बयान, SC ने लिया संज्ञान
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव के विवादित बयान का मुद्दा लोकसभा में गूंजने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। सर्वोच्च अदालत में मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट को विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ने कहा है कि मामले में उच्च न्यायालय से विवरण और विवरण मंगाया गया है और मामला विचाराधीन है। वहीं दूसरी ओर जस्टिस यादव के बयान पर सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति यादव के भाषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पत्र में पत्र में जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच की मांग की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायधीश शेखर कुमार यादव को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शेखर कुमार यादव के भाषण की समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट से विवरण और जानकारियां मंगाई गई हैं और मामला विचाराधीन है।

बता दें कि हाईकोर्ट के न्यायधीश शेखर कुमार यादव एक विहिप के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने मंच से बयान में कहा कि यूसीसी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना है।
जस्टिस शेखर यादव ने यह टिप्पणी पिछले हफ्ते रविवार (8 दिसंबर, 2024) को की थी। जब वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में विहिप के प्रांतीय विधिक प्रकोष्ठ एवं हाईकोर्ट इकाई के सम्मेलन में शामिल हुए। विहिप की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, जस्टिस शेखर यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "समानता न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर आधारित समान नागरिक संहिता भारत में लंबे समय से एक बहस का मुद्दा रही है...एक समान नागरिक संहिता, एक ऐसे सामान्य कानून को संदर्भित करती है जो व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, विरासत, तलाक, गोद लेने आदि में सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होता है।"












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