Mob Lynching: हर हाल में भीड़तंत्र को रोकना सरकार की जिम्मेदारी, हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती- SC
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नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से अलग-अलग शहरों में भीड़ द्वारा लोगों को मारने के मामले सामने आए हैं उसपर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। भीड़ द्वारा लोगों को मारे जाने पर कोर्ट ने कहा कि देश में किसी भी नागरिक को इस बात का अधिकार नहीं है कि वह कानून को अपने हाथ में ले, इसके लिए सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह कानून व्यवस्थाीा को लागू कराए और भीड़तंत्र पर लगाम लगाए।

हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि भय और अराजकता के माहौल में राज्य को सकारात्मक रुख दिखाना चाहिए, हिंसा को किसी भी हाल में इजाजत नहीं दी जा सकती है। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में कई शहरों में भीड़ द्वारा लोगों को मारने की घटनाएं सामने आई हैं। कई जगहों पर व्हाट्सएप पर अफवाह के चलते लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला है।
20 अगस्त की फिर से समीक्षा
इस मामले पर कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र नहीं ले सकता है, इससे निपटने के लिए सरकारें अलग-अलग कानून बनाएं। कोर्ट ने कहा कि चार हफ्ते के भीतर निर्देश लागू करे सरकार, साथ ही संसद को भीड़तंत्र के खिलाफ कानून बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि भीड़ की शिकार पीड़ित को मुआवजा मिले, इस मामले की में एक बार फिर से 20 अगस्त कोर्ट हालात की समीक्षा करेगा।
नया चलन नहीं बनने दे सकते
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ सिंह की पीठ ने कहा कि भीड़ और कथित गो रक्षकों द्वारा की जाने वाली हिंसा से निपटने के लिए सरकार कदम उठाए और इसके खिलाफ निरोधक, और दंडात्मक प्रावधान करे। भीड़तंत्र की भयावह गतिविधियों को नया चलन नहीं बनने दिया जा सकता है, इससे सख्ती से निपटना जरूरी है, इस तरह की घटनाओं को राज्य नजरअंदाज नहीं कर सकता है।
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