आयुष मंत्रालय के औषधि व प्रसाधन सामग्री से जुड़े आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आयुष मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना पर रोक लगा दी। इस अधिसूचना में 1945 के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के नियम 170 को हटाया गया था।

यह नियम आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों को प्रतिबंधित करता है। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अधिसूचना 7 मई, 2024 के अपने आदेश के विपरीत थी।

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7 मई, 2024 को, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि किसी विज्ञापन को जारी करने की अनुमति देने से पहले, 1994 के केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के अनुरूप विज्ञापनदाताओं से एक स्व-घोषणा प्राप्त की जानी चाहिए। न्यायालय के निर्देश का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना था।

इस निर्देश के बावजूद, आयुष मंत्रालय ने 1 जुलाई को 1945 के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के नियम 170 को छोड़ने के लिए एक अधिसूचना जारी की। यह कार्रवाई 29 अगस्त, 2023 के एक पूर्व पत्र को वापस लेने के बजाय की गई थी। अदालत ने कहा कि यह अधिसूचना उसके पिछले निर्देशों के विपरीत थी।

केन्द्र का पक्ष

केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि वह स्थिति स्पष्ट करने वाला एक हलफनामा दायर करेंगे। केंद्र ने पहले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अगस्त 2023 का पत्र लिखकर अपना बचाव किया था, जिसमें अधिकारियों से कहा गया था कि वे नियम 170 का उल्लंघन करने वाली किसी भी इकाई के खिलाफ कार्रवाई शुरू न करें।

केंद्र के हलफनामे में कहा गया है कि चूंकि अंतिम राजपत्र अधिसूचना की प्रक्रिया में और समय लगेगा, इसलिए आयुष मंत्रालय ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाइसेंसिंग अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियम 170 के तहत कोई कार्रवाई न करें। इस निर्देश का उद्देश्य विभिन्न राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लाइसेंसिंग अधिकारियों के बीच भ्रम से बचना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को रोकना था।

चल रही कानूनी कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट ने आयुष मंत्रालय के 29 अगस्त, 2023 के पत्र पर केंद्र से सवाल किया था। पीठ ने नटराज को निर्देश दिया था कि मंत्रालय पिछले साल के पत्र को तुरंत वापस ले ले। सर्वोच्च न्यायालय वर्तमान में 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

आईएमए की याचिका में कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ पतंजलि और योग गुरु रामदेव द्वारा एक स्मीयर अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है। चल रही कानूनी कार्यवाही इन आरोपों को व्यापक रूप से संबोधित करने की उम्मीद है।

भविष्य के विकास

आगे के आदेशों तक, नियम 170 को छोड़ने वाली अधिसूचना का प्रभाव स्थगित रहेगा। अदालत के फैसले ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है कि पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित विज्ञापन भ्रामक नहीं हैं और स्थापित नियमों का पालन करते हैं।

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