मुजफ्फरनगर दंगों को रोकने में नाकाम रही उत्‍तर प्रदेश सरकार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

muzaffarnagar.riots
नई दिल्‍ली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसला उत्‍तर प्रदेश की आखिलेश यादव सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया कि उत्‍तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 में जो दंगे हुए थे उसे रोकने में प्रदेश की सरकार पूरी तरह से नाकाम रही। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इन दंगों की जांच सीबीआई और एसआईटी से इन दंगों की जांच कराने से साफ इंकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश सरकार इन दंगों में साफतौर पर जिम्‍मेदार है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक सरकार ने हालातों को संभालने में भी लापरवाही बरती। उत्‍तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन दंगों से साफ जाहिर है कि प्रदेश की सरकार पीडि़तों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने में नाकाम रही।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उत्‍तर प्रदेश सरकार के खिलाफ ऐसे कोई भी सुबूत नहीं मिले जिनसे यह पता चलता हो कि प्रदेश की सरकार इस घटना में किसी तरह से शामिल थी।

उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर एक याचिका में कहा गया था दंगों की सीबीआई जांच कराई जाए और सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दावा किया था उसने इन दंगों को रोकने के लिए हर संभव कोशिश थी। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया था कि दंगों में मारे गए 65 लोगों के परिवारजनों को दिए जाने वाले मुआवजे में बढ़ोत्‍तरी की गई है और इसमें तीन लाख रुपए का इजाफा हुआ है।

जस्टिस पी सतशिवम, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस रंजन गोगोई को सरकार की ओर से सूचना दी गई कि अब प्रत्‍येक परिजन को 15 लाख रुपए सरकार की ओर से दिए जाएंगे। इसमें से 13 लाख रुपए राज्‍य सरकार और बाकी के दो लाख रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाएंगे।

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