Supreme Court ने ईसाई अधिकारी को धार्मिक कट्टरता के लिए लगाई फटकार, सेना के मूल्यों पर की टिप्पणी
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सेना में धार्मिक आचरण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सख्त प्रतिक्रिया दी है। बेंच ईसाई सैन्य अधिकारी के धार्मिक परेड में शामिल होने से इनकार के आधार पर बर्खास्तगी के मामले की सुनवाई कर रही थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अधिकारी के आचरण पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरासर अनुशासनहीनता है। ऐसा कट्टर आदमी सेना में क्या कर रहा था? कोर्ट ने अधिकारी को फिर से सर्विस में बहाल करने की याचिका नामंजूर कर दी।
भारतीय सेना की तीसरी घुड़सवार रेजिमेंट के पूर्व लेफ्टिनेंट, सैमुअल कमलेसन ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। साल 2021 में उन्हें सेना से बर्खास्त कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने परंपरा के मुताबिक रेजिमेंट की धार्मिक परेड में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के वावजूद अधिकारी ने गुरुद्वारे में होने वाले कीर्तन में हिस्सा नहीं लिया था।

Supreme Court ने अधिकारी को लगाई फटकार
याचिका के मुताबिक, 2017 में कमीशन मिलने के बाद कमलेसन को सिख स्वॉर्डन में नियुक्त किया गया था। रेजिमेंटल परेड के दौरान उन्हें मंदिर और गुरुद्वारे के भीतर जाने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने लगातार इससे परहेज किया। अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण मांगने पर उन्होंने कहा कि ईसाई होने की वजह से वे मंदिर या गुरुद्वारे के गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। चीफ जस्टिस ने बर्खास्तगी को उचित ठहराते हुए कहा कि सेना का अनुशासन और परंपरा का पालन जरूरी है। ऐसे झगड़ालू और धार्मिक विश्वासों को लेकर कट्टर व्यक्ति की सेना में कोई जगह नहीं हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी के वकील के भारत के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सेना के लिए इन प्रक्रियाओं में शामिल होना धार्मिक आस्था से जुड़ा मात्र नहीं है। यह अनुशासन और परंपरा है, जिसका पालन धार्मिक विश्वास से ऊपर उठकर होना चाहिए।
Indian Army की परंपरा में है धार्मिक उत्सवों का आयोजन
- सेना ने कोर्ट में बताया कि रेजिमेंट आधारित गतिविधियां धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि रेजिमेंट की परंपराओं का हिस्सा हैं।
- भारतीय सेना ने अपना पक्ष रखते हुए यह भी कहा कि कमांडिंग अधिकारियों ने उन्हें कई बार समझाया था।यहां तक कि ईसाई पादरी ने भी स्पष्ट किया कि 'सर्व-धर्म स्थल' पर जाना ईसाई धर्म के खिलाफ नहीं है।
- सेना ने बताया कि 2021 में उन्हें सेवा से हटाने से पहले कई बार समझाने की कोशिश की गई थी और सेना के मूल्यों के बारे में भी बताया गया था। इसके बावजूद अधिकारी अपनी जिद पर अड़े रहे।
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