सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु सरकार को झटका, RSS मार्च को दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसको सरकार ने आरएसएस के पथ संचलन के खिलाफ दायर किया था।

सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु सरकार का झटका लगा है। अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS) को रूट मार्च की अनुमति दे दी है। इसी के साथ मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए तमिलनाडु सरकार की आरएसएस मार्च के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है।
तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु में आरएसएस द्वारा रूट मार्च की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। आरएसएस का 47 स्थानों पर पथ संचलन निकलना है, जिसका तमिलनाडु सरकार विरोध कर रही है।
मौलिक अधिकार का बताया हनन
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे मंगलवार को न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन और पंकज मिथल की बेंच ने खारिज कर दिया। इससे पहले आरएसएस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत आरएसएस ने पथ संचलन को शांतिपूर्वक जमा होने के मौलिक अधिकार का हनन बताया था।
सरकार ने बताई थी ये वजह
सरकार ने अपनी याचिका में बताया था कि कई जिलों में सड़क पर मार्च से खतरा हो सकता है। राज्य सरकार याचिका में बताया कि पथ संचलन से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। जिस पर जेठमलानी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में ये मार्च निकाले गए, वहां से हिंसा की एक भी घटना की सूचना नहीं है।
तमिलनाडु सरकार ने 3 मार्च को शीर्ष अदालत से कहा था कि वह 5 मार्च को राज्य भर में आरएसएस के रूट मार्च और जनसभाओं की अनुमति देने के पूरी तरह से विरोध में नहीं है, लेकिन खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ये हर गली या इलाके में आयोजित नहीं किए जा सकते हैं।












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