सुप्रीम कोर्ट ने एक समान ड्रेस कोड पर सुनवाई से किया इनकार, कहा-'ये कोई जरूरी मामला नहीं'
नई दिल्ली, 16 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों के लिए एक समान ड्रेस कोड की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसको लेकर कोर्ट में सुनवाई की जाए। हालांकि, इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने माननीय न्यायधीश को मनाने की कोशिश की और कहा कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है, जो कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की भावना के खिलाफ है।

माननीय न्यायधीश से अनुरोध करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है। इसकी डिटेल्स आप पृष्ठ 58 पर देख सकते हैं और उसी आधार पर कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए एक सामान ड्रेस कोड पर निर्देशित करें। आपके पास अधिकार है और इसको लेकर आप आदेश दे सकते हैं। क्योंकि आरटीई के तहत एकरूपता और अनुशासन होना जरूरी है। इसके बाद अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि उनकी प्रार्थना है कि देश के सभी स्कूलों में एक यूनिफॉर्म न हो, लेकिन एकरूपता को तो सुनिश्चित किया जाए। इसके बावजूद भी बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि यह कोर्ट के दायरे में नहीं आता है।
Supreme Court refuses to entertain a PIL seeking a uniform dress code for students and teachers in educational institutions across the country. pic.twitter.com/KkxezQHVIt
— ANI (@ANI) September 16, 2022
वहीं, जब कोर्ट ने कहा कि वह मामले में सुनवाई के इच्छुक नहीं है, इस पर याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी गई।
इसके अलावा याचिकाकर्ता निखिल उपाध्याय ने कहा कि एक सामान्य ड्रेस कोड सामाजिक समानता को सुरक्षित करेगा। साथ ही इससे भाईचारा और राष्ट्रीय एकता भी बढ़ेगी। याचिका में 2 फरवरी, 2022 को कर्नाटक में हिजाब को लेकर हुए बवाल का भी जिक्र किया गया था। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया था कि शैक्षणिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष- सार्वजनिक स्थान हैं। साथ ही ये शिक्षा व रोजगार एवं अच्छे स्वास्थ्य प्रदान करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान भी दे रहे हैं। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में सामान्य ड्रेस कोड लागू करना जरूरी है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि अगर आज इस नियम को नहीं लागू किया जाता है, तो कल को नागा-साधु किसी भी स्कूल और कॉलेज में प्रवेश लेकर बिना कपड़ों के बैठ सकेंगे। ऐसे में एक ड्रेस कोड, एकरूपता को बढ़ावा देने के अलावा, विभिन्न जाति, पंथ, धर्म, संस्कृति और स्थान से आने वाले छात्रों के बीच सौहार्द की भावना को बढ़ावा देगा।
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