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सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन ना देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दो महीने का दिया वक्त

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन न देने पर भारतीय सेना की आलोचना की है। स्थायी आयोग (परमानेंट कमीशन) के लिए महिला अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेना की तरफ परमानेंट कमीशन के अनुदान के लिए अपनाए गए नियम मनमाना और भेदभावपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने सेना को दो महीने के भीतर महिला अधिकारियों के लिए स्थायी आयोग के अनुदान पर विचार करने का निर्देश दिया है।

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    Supreme Court का Army में महिलाओं की Permanent Commission पर बड़ा आदेश | वनइंडिया हिंदी

    सुप्रीम कोर्ट ने सेना से अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) प्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमारे समाज की संरचना पुरुषों द्वारा पुरुषों के लिए बनाई गई है। कुछ हानिरहित दिखते हैं, लेकिन यह हमारे समाज का पितृसत्तात्मक प्रतिबिंब है। कोर्ट ने कहा कि सेना ने मेडिकल के लिए जो नियम बनाए है, वो महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करता है। महिलाओं को बराबर अवसर दिए बिना समाधान नहीं निकला जा सकता है।

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    भारतीय सेना और नेवी में स्थायी आयोग के लिए महिला अधिकारियों ने याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उन लोगों के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई की जाए, जिन्होंने कथित रूप से कोर्ट के फैसले का पालन नहीं किया।

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    English summary
    supreme court on women Permanent Commission Indian army
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