Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

'जाइए अपने देवता से कहिए वे खुद करें', टूटी प्रतिमा को बदलने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

Supreme Court on Khajuraho Temple: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे मामले में अहम टिप्पणी की, जिसने सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक सबका ध्यान खींचा। मामला मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर से जुड़ा है, जहां भगवान विष्णु की एक प्रतिमा का सिर टूटा हुआ है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि टूटी हुई मूर्ति को बदला जाए और उसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और इसे 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बी आर गवई ने जो टिप्पणी की, वह अब काफी चर्चा का विषय बन गई है।

Supreme Court on Khajuraho Temple

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की सात फीट ऊंची प्रतिमा टूटी हुई अवस्था में है। याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने दावा किया कि मुगल आक्रमणों के दौरान प्रतिमा क्षतिग्रस्त हुई थी और वर्षों से सरकार को ज्ञापन देने के बावजूद इसका पुनर्निर्माण नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से 'प्रचार के लिए' लगाई गई याचिका है।

सीजेआई बी आर गवई की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बी आर गवई ने कहा, 'जाइए और अपने देवता से कहिए कि वे खुद कुछ करें। अगर आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं तो प्रार्थना और ध्यान कीजिए।' सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि यह मामला पूरी तरह से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

ये भी पढे़ं: Bombay High Court: '15 दिन तक रोज तीन घंटे', झूठी FIR पर शख्स को मिली अनोखी सजा, अदालत ने दिया गजब का आदेश

एएसआई और पुरातात्विक महत्व

अदालत ने स्पष्ट किया कि खजुराहो मंदिर परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और किसी भी प्रतिमा का पुनर्निर्माण या परिवर्तन एएसआई की अनुमति के बिना संभव नहीं है। सीजेआई ने यह भी सुझाव दिया कि अगर याचिकाकर्ता शैव धर्म के विरोधी नहीं हैं तो वे वहां स्थित विशाल शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता के तर्क

राकेश दलाल ने तर्क दिया कि टूटी मूर्ति को बहाल न करना भक्तों के पूजा करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्वतंत्रता के 77 साल बाद भी सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

ये भी पढ़ें: Bombay High Court: '15 दिन तक रोज तीन घंटे', झूठी FIR पर शख्स को मिली अनोखी सजा, अदालत ने दिया गजब का आदेश

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+