Bombay High Court: '15 दिन तक रोज तीन घंटे', झूठी FIR पर शख्स को मिली अनोखी सजा, अदालत ने दिया गजब का आदेश
Bombay High Court: जी एंटरटेनमेंट के टीवी सीरियल 'तुम से तुम तक' की कहानी अचानक अदालत तक पहुंच गई। एक व्यक्ति ने इस सीरियल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान उसने बार-बार अपनी पहचान बदलकर कोर्ट को चकमा देने की कोशिश की। अदालत ने इस चौंकाने वाली हरकत को गंभीरता से लिया और शख्स को अनोखी सजा सुना दी।
मुंबई हाईकोर्ट ने आरोपी व्यक्ति को 15 दिन की सजा सुनाई। यह सजा सुनकर हर कोई हैरान रह गया। आइए जानते हैं क्या है ये पूरा मामला?

शिकायत पर जी एंटरटेनमेंट को मिला नोटिस
दरअसल, 'तुम से तुम तक' सीरियल को Zee 5 पर 16 जून, 2025 को रिलीज किया जाना था। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इसमें ऐसा कंटेंट था जो सार्वजनिक भावनाओं को आहत कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस को 12 जून को यह शिकायत मिली, जिसके आधार पर जी एंटरटेनमेंट को नोटिस जारी कर सीरियल की प्रसारण प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए गए।
4 जुलाई को जी एंटरटेनमेंट ने नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जब कंपनी ने शिकायतकर्ता सुनील महेंद्र शर्मा से उनके बताए पते पर संपर्क करने की कोशिश की, तो बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड ने कहा कि वहां ऐसा कोई व्यक्ति नहीं रहता।
8 जुलाई को न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच ने संबंधित पुलिस अधिकारी को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और स्थायी पते का प्रमाण सहित कोर्ट में पेश किया जाए। पुलिस ने बताया कि शर्मा को एक अलग पते से ट्रेस किया गया था, जो 12 जून की शिकायत में नहीं दिया गया था। शर्मा को उसी दिन कोर्ट में पेश किया गया। पहचान दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि वह सुनील महेंद्र शर्मा नहीं बल्कि महेंद्र संजय शर्मा है।
फर्जी नाम का खुलासा होने पर शिकायतकर्ता ने क्या कहा?
कोर्ट ने शिकायतकर्ता को कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, जिसे उसके दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर से मिलाया गया। अदालत को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने बड़ी मीडिया हाउस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए अपनी सुरक्षा हेतु अलग पहचान बनाई थी।
कोर्ट ने खारिज किया शख्स का दावा
12 अगस्त को डिवीजन बेंच ने शर्मा के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि यह शिकायत गलत इरादे से की गई थी। न्यायाधीशों ने जांच अधिकारी की लापरवाही पर भी नाराजगी जताई और कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे शिकायतकर्ता के दस्तावेजों की पुष्टि करें।
झूठी FIR पर शख्स को मिली अनोखी सजा
अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी (IO) ने पूरी सावधानी नहीं बरती और उनकी लापरवाही साफ दिखती है। अदालत ने यह भी बताया कि इस तरह की झूठी शिकायतें न्याय प्रणाली में रुकावट डालती हैं। इसलिए शर्मा को आदेश दिया गया कि वह 15 दिन तक जेजे हॉस्पिटल में सफाई और पोछा करने का काम करें।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 23 के अनुसार, सामुदायिक सेवा एक ऐसा दंड है जो समाज को लाभ पहुंचाता है। वहीं धारा 4(f) उन अपराधों की सूची देती है, जिनमें मानहानि शामिल है, और जिसके लिए ऐसा दंड दिया जा सकता है।












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