'1995 के कानून को अब 2025 में क्यों चुनौती दी गई', वक्फ कानून याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
Supreme Court Waqf Act: सुप्रीम कोर्ट ने आज (27 मई) वक्फ अधिनियम 1995 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को 1995 के वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।
याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम 1995 की विभिन्न धाराओं-जैसे कि धारा 3(r), 4, 5, 6(1), 7(1), 8, 28, 29, 33, 36, 41, 52, 83, 85, 89, 101-को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 27 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि वक्फ अधिनियम केवल मुस्लिम समुदाय के लिए धर्मार्थ संपत्तियों के प्रशासन से संबंधित कानून प्रदान करता है, जबकि अन्य धर्मों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है, जो कि भेदभावपूर्ण है।

जस्टिस बीआर गवई बोले- 1995 के कानून को 2025 में क्यों चुनौती दी जा रही है?
मुख्य न्यायाधीश गवई ने याचिकाकर्ता से पूछा कि 1995 के अधिनियम (कानून) को अब, 2025 में, क्यों चुनौती दी जा रही है और देरी के आधार पर याचिका खारिज करने की संभावना जताई। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया कि 2013 के संशोधन को भी चुनौती दी गई है और सुप्रीम कोर्ट पहले से ही 2020-21 में दायर पूजा स्थलों अधिनियम 1991 और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि अदालत ने 1995 के अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को 2025 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ नहीं जोड़ा है, लेकिन वर्तमान याचिका को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ जोड़े जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे अन्य संबंधित मामलों के साथ जोड़ दिया है। अब केंद्र सरकार और सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को इस याचिका पर जवाब देना होगा।












Click it and Unblock the Notifications