मनी लॉन्ड्रिंग: सत्येंद्र जैन को फिर सुप्रीम कोर्ट से राहत, अंतरिम जमानत 12 सितंबर तक बढ़ी
दिल्ली के पूर्व मंत्री और AAP नेता सत्येन्द्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिर राहत मिली है, जहां उनकी अंतरिम जमानत 12 सितंबर तक बढ़ा दी गई। उनके वकीलों के मुताबिक कोर्ट ने चिकित्सा आधार पर ये राहत दी है।
दरअसल जब जैन दिल्ली के मंत्री थे, तो उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा था। इसकी जांच ईडी और सीबीआई कर रही है। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई और करीब एक साल तक वो जेल में रहे। वहां पर उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को 26 मई को 6 हफ्तों की अंतरिम जमानत दे दी थी। उनको ये जमानत स्वास्थ्य कारणों से दी गई। जिसको सर्वोच्च अदालत ने फिर से बढ़ा दिया है।
वाशरूम में गिर गए थे
सत्येंद्र जैन के वकीलों के मुताबिक जेल के वॉशरूम में वो चक्कर खाकर गिर पड़े थे। जिसके बाद उनको एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में सीएम केजरीवाल भी उन्हें देखने पहुंचे। हालांकि अपने पुराने साथी की हालत देख वो भावुक हो गए थे।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने खुद को केस से किया अलग
वहीं इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की कोर्ट कर रही थी, लेकिन शुक्रवार की सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। इससे पहले उमर खालिद की जमानत मामले में उन्होंने ऐसा कदम उठाया था।
जैन के ऊपर ये आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक जैन ने 2010-2012 के दौरान 11.78 करोड़ रुपये और 2015-16 के दौरान 4.63 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है। उस वक्त भी वो दिल्ली के मंत्री थे। उनके ऊपर तीन कंपनियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। जिनका नाम पारियास इंफोसोल्यूशन, इंडो मेटालिम्पेक्स, अकिंचन डेवलपर्स और मंगलायतन प्रोजेक्ट्स है। हालांकि AAP शुरू से इस बात को खारिज कर रही। उसका दावा है कि बीजेपी जैन को अपने साथ मिलाना चाहती थी, लेकिन जब वो नहीं माने, तो उसने ये कदम उठाया।












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