केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये के चलते हो रही हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति में देरी: SC
नई दिल्ली, 10 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर देशभर में अलग-अलग हाई कोर्ट में खाली पड़ी जजों की जगह को लेकर खीज निकाली है। 9 अगस्त को एक आदेश पास किया गया है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सरकार का अड़ियल रवैया है कि वह हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति कई साल से बावजूद इसके नहीं कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले ही जजों के नाम की सिफारिश बहुत पहले कर दी है। कॉलेजियम की ओर से जजों की नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद भी कोर्ट ने इन जजों की नियुक्ति अभी तक नहीं की है, जिसकी वजह से लंबित केस की संख्या बढ़ रही है।

जस्टिस संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की डिवीजन बेंच ने यह गंभीर टिप्पणी केंद्र सरकार को लेकर की है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने डंपिंग रोधी कार्रवाई के संबंध में वार्ता आदेश दिया था, जिसके बाद कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को लेकर यह टिप्पणी की है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट इस स्थिति में नहीं है कि वह इस मामले की जल्दी सुनवाई कर सके क्योंकि हाई कोर्ट सिर्फ 50 फीसदी जजों के साथ काम कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हम इस याचिका में उठाई गई दिक्कतों को लेकर समस्या का सामना कर रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार का हाई कोर्ट के जजों नियुक्ति में रुख काफी अड़ियल है, कई सालों कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी जजों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। इसके अलावा बेंच ने यह भी कहा कि बड़ी दिक्कत यह है कि जजों की कमी की वजह से इस तरह के मसलों को जल्दी सुनवाई के लिए नहीं लाया जा सकता है। देश की राजधानी में भी जजों की कमी है और यही वजह है कि मामले लंबित हो रहे हैं।
इस मामले में अडिशनल सॉलिसिटर जनर माधवी दीवान कोर्ट में पेश हुई थीं, उनसे कोर्ट ने कहा कि कई महीने और साल के बाद सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम जजों के नाम की सिफारिश करती है और इसके बाद कई महीने और साल कॉलेजियम के नाम फाइनल करने के बाद सरकार लगाती है। जिसके चलते हाई कोर्ट में जजों की किल्लत होती है और मामले लंबित हो जाते हैं और जरूरी मसलों को भी जल्दी सुनवाई नहीं हो पाती है।












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