Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की EVM से पार्टी सिंबल हटाने की मांग वाली याचिका
Supreme Court , सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें ईवीएम पर राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न हटाकर प्रत्याशी की फोटो लगाने की मांग की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को बैलट पेपर और ईवीएम से पार्टी का सिंबल हटाने का निर्देश दिया जाए। सिंबल के बदले में ईवीएम पर उम्मीदवार का नाम, उम्र, शिक्षा और तस्वीर लगाए जाने की मांग की गई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि,कोई भी जब किसी राजनीतिक दल का प्रत्याशी बनता है, तो पार्टी का चुनाव चिह्न ही उसकी पहचान होती है। अगर पार्टी का सिंबल ईवीएम पर नहीं लगाया जाएगा, तो वह कैसे अपने राजनीतिक दल को रिप्रेजेंट करेगा? अपनी दलीलें निर्वाचन आयोग को जाकर बताएं।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने दलील दी कि अगर किसी उम्मीदवार को वोट करते समय मतदाता देखेगा, तो सिस्टम में बेहतर लोग होंगे। पार्टी बेहतर लोगों को टिकट देने के लिए मजबूर होगी। यह प्रक्रिया ब्राजील में चल रही है। जहां कोई प्रतीक नहीं है। ताकि मतदाता जाकर प्रत्याशी के आधार पर वोट दें, ना कि पार्टी के नाम पर वोट दें।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि हम चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग कर रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि आप ऐसा किस आधार पर कर रहे हैं? वकील विकास सिंह ने कहा कि हम ऐसा अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर कर रहे हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि ईवीएम पर पार्टी के चिह्नों का प्रदर्शन मतदाताओं की पसंद को प्रभावित करता है और उन्हें चुनावी उम्मीदवारों की विश्वसनीयता के आधार पर चुनाव करने का मौका देता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं में आपराधिकता बढ़ी है।
मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर भारतीय चुनाव आयोग द्वारा याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व पर विचार किया जाता है तो यह न्याय का अंत होगा। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। जिसमें उन्होंने ईवीएम से पार्टी चिह्न हटाने की मांग की थी।












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