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दलित उत्पीड़न एक्ट के आदेश को वापस लिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट के तहत सबसे अहम नियम को खत्म किए जाने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला देगा। दरअसल एसएसी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किए जाने के बाद तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को खत्म कर दिया गया था, जिसके बाद इसको लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी और अपील की गई थी कि मार्च 2018 के आदेश को वापस लिया जाए, जिसमे कहा गया था कि एसएसी-एसटी एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तार नहीं होगी।

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कोर्ट का फैसला

कोर्ट ने इस एक्ट के तहत दो फैसले दिए थे, पहले आदेश में कोर्ट ने कहा था कि दलित उत्पीड़न मामले में अग्रिम जमानत का प्रावधान होगा, जबकि दूसरे आदेश के तहत कहा गया था कि गिरफ्तारी से पहले मामले की जांच की जाएगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में इसका काफी विरोध हुआ था। भारी विरोध और राजनीतिक दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट से अपील की थी कि वह अपने फैसले पर फिर से विचार करे। जिसके बाद आज कोर्ट इस मामले में अहम फैसला दे सकता है।

केंद्र ने किया था विरोध

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि इस फैसले से एसएसी-एसटी एक्ट के सबसे अहम प्रावधान को खत्म कर दिया गया, जिससे एसएसी-एसटी वर्ग के लोगों का भरोसा इस बात को लेकर कमजोर हुआ है कि राज्य उनकी रक्षा कर सकता है। कोर्ट की ओर से कहा गया कि निर्दोष लोगों को बचाने के लिए यह बदलाव जरूरी था। कोर्ट ने कहा था कि इस कानून का दुरुपयोग कुछ मौको पर हुआ है, सरकारी कर्मचारियों को उनका काम करने से रोका गया है।

संसद ने बदला फैसला

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) कानून की पहले की स्थिति बहाल करने के लिए इसमें किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। पिछले साल अगस्त में, संसद ने 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश को पलटते हुए संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसमें अधिनियम के तहत निर्दोष लोगों के झूठे आरोप से बचने के लिए प्रारंभिक जांच के बिना गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी।

हुए थे प्रदर्शन

इसमें प्रावधान है कि आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और इस कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता भी नहीं है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए इस अधिनियम में किए गए बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

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