अदालतों में कैसे घटेंगे करोड़ों पेंडिंग केस? CJI सूर्यकांत ने समझा दिया पूरा रोडमैप
CJI Surya Kant On Pending Cases: देश के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार,6 दिसंबर को साफ कर दिया कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी प्राथमिकता अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों को कम करना होगी।
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) 2025 के 23वें संस्करण में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि 'मेडिएशन' और 'लिटिगेशन' दो प्रमुख उपकरण होंगे जिनके ज़रिए अदालतों पर बोझ को कम किया जाएगा और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा। पढ़िए सीजेआई ने क्या कहा...

लंबित मामलों पर CJI ने क्या कहा?
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में CJI कांत ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में पूर्वानुमानित समयसीमा (Predictable Timelines) और शीघ्र निस्तारण पर आधारित राष्ट्रीय न्यायिक नीति उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा मेरी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान हो सके और न्यायिक प्रक्रिया पूर्वानुमानित बने।
'मेडिएशन मिशन'-छह महीनों में बड़ा अभियान
CJI सुर्या कांत ने बताया कि पिछले छह महीनों में उन्होंने एक व्यापक मेडिएशन मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य मध्यस्थता के ज़रिए विवादों का अदालत के बाहर तेज़ समाधान करना है। उन्होंने कहा, मध्यस्थता एक ऐसा उपकरण है जिसे मैं न्यायपालिका के सहयोग से लोकप्रिय बनाना चाहता हूं, ताकि मामलों का बोझ कम हो और लोगों को तेज़ न्याय मिले। इससे पहले भी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पेंडिंग केस पर कड़ा रुख अपनाया है।
सीजेआई ने यह भी साफ किया कि अदालतें केवल बड़े संवैधानिक मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों की न्यायिक जरूरतों के लिए भी हैं। उनके शब्दों में हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी की आवाज़ के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
24 नवंबर को बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश
24 नवंबर 2025 को शपथ लेने वाले CJI सुर्या कांत को एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है जो कानूनी गहराई और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों को संतुलित करते हैं। ग्रामीण परिवेश से आए होने के कारण उनकी न्यायशैली में संवेदनशीलता और आम जनता की समस्याओं को समझने का दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, आपराधिक और प्रशासनिक मामलों में ऐतिहासिक फैसले दिए। उन्होंने अनुच्छेद 370 से जुड़े केस, राज्यपाल की शक्तियों पर राष्ट्रपति के संदर्भ मामले में फैसले सुनाए हैं।












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