• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

पति की मौत पर नहीं रोई महिला तो मिली थी उम्रकैद की सजा, अब सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

|

नई दिल्ली। अपने पति की हत्या के मामले में असम की एक महिला को स्थानीय अदालत ने न केवल दोषी करार दिया बल्कि उम्र कैद की सजा भी सुनाई थी। अदालत ने ये आदेश इस बात को आधार मानकर दिया था क्योंकि महिला अपने पति की अप्राकृतिक मौत पर रोई नहीं थी। स्थानीय कोर्ट के फैसले को बाद में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी महिला की सजा को बरकरार रखा था। पिछले करीब पांच साल से जेल की सजा काट रही महिला को अब सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान ने कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि महिला अपने पति की आकस्मिक मौत पर नहीं रोई तो वही उसकी हत्या की दोषी है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए महिला को बरी करने का आदेश सुनाया।

इसे भी पढ़ें:- 2019 में इस गेमचेंजर प्लान से बिहार में वापसी करेगी कांग्रेस

सुप्रीम कोर्ट से महिला को मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट से महिला को मिली बड़ी राहत

31 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य सबूतों से ये कतई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इस महिला ने ही अपने पति की हत्या की थी। यही वजह है कि जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने तुरंत उम्रकैद की सजा काट रही महिला को बरी करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद महिला को बड़ी राहत मिली होगी।

निचली अदालत ने दिया था दोषी करार

निचली अदालत ने दिया था दोषी करार

इससे पहले इस केस में असम की निचली अदालत ने महिला को दोषी करार देने के लिए इसी तर्क को मुख्य आधार माना था कि महिला अपने पति की आकस्मिक मौत पर रोई नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि पति की मौत पर पत्नी का नहीं रोना बेहद चौंकाने वाला रवैया है, ये बिना किसी संदेह के महिला को दोषी साबित करता है। स्थानीय कोर्ट ने इसी के साथ इस बात को भी आधार माना कि जिस समय उसके पति की मौत हुई थी महिला आखिरी बार उसके साथ ही देखी गई थी।

हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को रखा था बरकरार

हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को रखा था बरकरार

निचली अदालत के बाद मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुंचा, वहां भी महिला की सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा। दोनों ही कोर्ट ने इसी बात को आधार माना कि हत्या वाली रात महिला आखिरी बार अपने पति के साथ थी। पति की अचानक मौत पर महिला नहीं रोई नहीं, इन तर्कों से महिला पर शक और मजबूत होता है। इसी के आधार पर कोर्ट ने महिला को उम्र कैद की सजा सुनाई। हालांकि अब महिला को सुप्रीम कोर्ट बड़ी राहत मिली है, कोर्ट ने महिला को बरी करने का आदेश देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य सबूतों से साफ नहीं होता कि महिला ने ही अपने पति की हत्या की है।

इसे भी पढ़ें:- MeToo पर बोलीं सपना चौधरी, ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Supreme Court acquits Assam woman who did not cry at husband death.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more